नौरंगिया कविता में निहित नारी भावना को स्पष्ट कीजिए

नौरंगिया कविता में निहित नारी भावना को स्पष्ट कीजिए। Naurangiya Kavita Me Nihit Naari Bhavna

नौरंगिया कविता में निहित नारी भावना को स्पष्ट कीजिए। Naurangiya Kavita Me Nihit Naari Bhavna

‘नौरंगिया’ कविता में कवि ने ग्रामीण जीवन की एक साधारण स्त्री के माध्यम से नारी की वास्तविक, सशक्त और संघर्षशील छवि प्रस्तुत की है। नौरंगिया देवी-देवताओं या अंधविश्वासों में नहीं उलझती, बल्कि अपने श्रम और आत्मबल पर विश्वास करती है। वह ताकतवरों से टकराने का साहस रखती है और अपने बूते खेती करके जीवन का निर्वाह करती है।

नौरंगिया पुरुष के समान अधिकार और सम्मान के साथ जीवन जीने वाली नारी है। वह अपने पति के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलती है—साथ-साथ खाती-पीती है और जीवन के संघर्षों को मिलकर झेलती है। यह नारी की समानता और आत्मसम्मान को दर्शाता है।

कविता में नौरंगिया के यौवन और सौंदर्य का भी चित्रण हुआ है, परंतु कवि यह स्पष्ट करता है कि उसका सौंदर्य उसके लिए चुनौती बन जाता है। भ्रष्ट व्यवस्था और समाज की कुटिल मानसिकता उसके जीवन को और कठिन बना देती है। फिर भी वह अपने चरित्र, संयम और आत्मबल से स्वयं को बचाए रखती है।

नौरंगिया दिन-रात कठिन परिश्रम करती है और कभी हार नहीं मानती। गरीबी, कर्ज, टूटी झोपड़ी, महाजनों का दबाव और अभावों के बावजूद उसके चेहरे से मुस्कान नहीं मिटती। वह हर परिस्थिति में धैर्य, साहस और आशा के साथ जीवन जीती है।

इस प्रकार, ‘नौरंगिया’ कविता में निहित नारी भावना संघर्ष, श्रम, आत्मनिर्भरता, त्याग, सहनशीलता और स्वाभिमान के रूप में प्रकट होती है। नौरंगिया सम्पूर्ण भारतीय ग्रामीण नारी की सशक्त, प्रेरणादायक और जीवंत प्रतिनिधि है।

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