पापा खो गए प्रश्न उत्तर क्लास 7 ॥ Papa Kho Gaye Ka Prashn Uttar Class 7

पापा खो गए प्रश्न उत्तर क्लास 7 ॥ Papa Kho Gaye Ka Prashn Uttar Class 7

पापा खो गए प्रश्न उत्तर क्लास 7 ॥ Papa Kho Gaye Ka Prashn Uttar Class 7

वस्तुनिष्ठ प्रश्न:

निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प चुनिए –

प्रश्न 1. खंभा अपनी तबीयत को किसका बना कहता है?
(क) लकड़ी का
(ख) लोहे का
(ग) पीतल का
(घ) अल्यूमिनियम का

उत्तर : (ख) लोहे का

प्रश्न 2. लाल ताऊ किसे कहा गया है?
(क) पेड़ को
(ख) खंभे को
(ग) लेटर बाक्स को
(घ) कौआ को

उत्तर : (ग) लेटर बाक्स को

प्रश्न 3. सभी वस्तुएँ छोटी लड़की को क्या करती है?
(क) निरीक्षण
(ख) संरक्षण
(ग) आरक्षण
(घ) इनमें से कोई नहीं।

उत्तर : (ख) संरक्षण

लघूत्तरीय प्रश्न

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

प्रश्न 1. पेड़ किसका कोट पहनता है?

उत्तर :
पेड़ अपने पत्तों का कोट पहनता है।

प्रश्न 2. पेड़ को रात में बोरियत क्यों होती है?

उत्तर :
पेड़ को रात में बोरियत होती है क्योंकि रात बहुत लंबी लगती है और जल्दी खत्म नहीं होती। कभी-कभी बिजली चमकती है और बारिश भी होती है, जिससे पेड़ डर जाता है।

प्रश्न 3. परीक्षित लड़के को क्या अच्छा लगता है?

उत्तर :
परीक्षित को पढ़ाई में ध्यान नहीं लगता। उसे कक्षा से गायब होकर खेलना ज्यादा अच्छा लगता है।

प्रश्न 4. घुँघरुओं की आवाज कब होती है?

उत्तर :
पोस्टर पर बनी नाचने वाली का संतुलन बिगड़ जाने पर घुँघरुओं की आवाज होती है।

प्रश्न 5. नाटक में सभी पात्रों ने लड़की को दुष्ट आदमी से कैसे बचाया?

उत्तर :
नाटक में सभी पात्र सरकते-सरकते उस दुष्ट आदमी के रास्ते में आ जाते हैं और लड़की की रक्षा करते हैं। लड़की दुष्ट आदमी के हाथ नहीं लगती। तभी कौआ, खंभा, पेड़ और लेटर बॉक्स सभी भूत-भूत चिल्लाने लगते हैं। यह सुनकर वह आदमी घबराकर भाग जाता है। इस प्रकार सभी पात्र मिलकर लड़की को बचा लेते हैं।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए ।

प्रश्न 1. पेड़ और खंभे में किस प्रकार की दोस्ती हुई?

उत्तर :
एक दिन आँधी-पानी में खंभा पेड़ के ऊपर गिर गया। पेड़ खड़ा था, इसलिए उसने खंभे को संभाल लिया। पेड़ भी थोड़ा घायल हो गया। इस घटना के बाद खंभे का घमंड खत्म हो गया और दोनों में दोस्ती हो गई।

प्रश्न 2. लेटर बॉक्स हेडमास्टर होने की इच्छा क्यों प्रकट करता है?

उत्तर :
लेटर बॉक्स हेडमास्टर का पत्र पढ़कर सोचता है कि माता-पिता बड़ी मेहनत से बच्चों की फीस देते हैं। लेकिन कुछ बच्चे कक्षा से गायब होकर खेलते रहते हैं। यह ठीक नहीं है। इसलिए परीक्षित जैसे लड़कों को सुधारने के लिए लेटर बॉक्स हेडमास्टर बनने की इच्छा प्रकट करता है।

प्रश्न 3. नाटक में आप किसे सबसे अधिक बुद्धिमान पात्र समझते हैं और क्यों?

उत्तर :
नाटक में सबसे अधिक बुद्धिमान पात्र कौआ है। वह सबसे समझदार है और सभी पात्रों को संकेत देकर सही निर्देश देता है। लड़की को बचाने और दुष्ट आदमी को भगाने में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। कौआ पेड़ और खंभे को भी निर्देश देता है कि पेड़ लड़की पर घनी छाया करे और खंभा टेढ़ा होकर खड़ा रहे। वह लेटर बॉक्स से यह भी लिखवाता है कि बच्ची के पापा खो गए हैं। इस प्रकार कौए की बुद्धिमानी से बच्ची बच जाती है।

प्रश्न 4. लड़की के पापा का पता लगाने के लिए सभी पात्रों ने क्या किया?

उत्तर :
कौए की योजना के अनुसार पेड़ ने लड़की पर घनी छाया कर दी और खंभा टेढ़ा होकर खड़ा हो गया। कौआ काँव-काँव करने लगा ताकि लोगों का ध्यान इधर आए। पुलिस इसे दुर्घटना समझकर वहाँ पहुँच सके। फिर लेटर बॉक्स ने सिनेमा के पोस्टर पर बड़े-बड़े अक्षरों में लिख दिया – “पापा खो गए हैं।” वह लोगों से कहने लगा कि यदि किसी को इस बच्ची के पापा मिल जाएँ तो उन्हें तुरंत यहाँ ले आएँ।

यथानिर्देश उत्तर दीजिए।

(क) ‘अंग थर-थर काँपने लगते हैं।’

प्रश्न 1. यह किसने किससे कहा?

उत्तर :
यह पेड़ ने खंभे से कहा।

प्रश्न 2. वक्ता के अंग क्यों थर-थर काँपने लगते हैं?

उत्तर :
एक रात आसमान से पेड़ पर बिजली गिर गई थी, जिससे वहाँ गहरा गड्ढा बन गया। जब भी बारिश होती है, उसे उस रात की याद आ जाती है। यह याद आते ही उसका दिल धक-धक करने लगता है और उसके अंग थर-थर काँपने लगते हैं।

(ख) ‘इसीलिए तो मुझे अपना बहुत महत्व लगता है।’

प्रश्न 1. यह पंक्ति किस पाठ से उद्धृत है? इसके लेखक का नाम लिखिए।

उत्तर :
यह पंक्ति ‘पापा खो गए’ पाठ से उद्धृत है। इसके लेखक का नाम विजय तेंदुलकर है।

प्रश्न 2. किसे अपना महत्व लगता है और क्यों?

उत्तर :
लेटर बॉक्स को अपना महत्व लगता है। वह किसी की चिट्ठी अपने पास नहीं रखता, बल्कि सही व्यक्ति तक पहुँचा देता है। वह लोगों की गुप्त बातें भी बाहर नहीं आने देता। इसलिए उसे अपना महत्व महसूस होता है।

भाषा-बोध 

प्रश्न 1. निम्नलिखित शब्दों से उपसर्ग एवं मूल शब्द पृथक कीजिए।

शब्दउपसर्गमूल शब्द
बेहोशीबेहोशी
निर्जीवनि:(निर)जीव
संरक्षणसम्रक्षण

 

प्रश्न 2. निम्नलिखित शब्दों से प्रत्यय पृथक कीजिए।

शब्दमूल शब्दप्रत्यय
बहावबहआव
अकेलापनअकेलापन
नाचनेवालीनाचनेवाली
भनभनाहटभनभनआहट
पढ़ाईपढ़आई

 

प्रश्न 3. निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखिए :

शब्दपर्यायवाची शब्द
समुद्रसागर, जलधि, उदधि
बिजलीविद्युत, दामिनी, चपला
औरतस्त्री, नारी, महिला
हवावायु, पवन, समीर
रातरात्रि, निशा, यामिनी
आसमानआकाश, गगन, अम्बर

 

प्रश्न 4. निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिए :

शब्दविलोम शब्द
गुप्तप्रकट
जल्दीदेर
बुराअच्छा
दुष्टसज्जन
स्वीकृतिअस्वीकृति

 

प्रश्न 5. निम्नलिखित शब्दों का प्रयोग वाक्य में कीजिए :

शब्दवाक्य
तबीयतआज मेरी तबीयत ठीक नहीं है।
तकलीफउसे चलते समय बहुत तकलीफ हो रही थी।
संतुलनसाइकिल चलाते समय संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
हैरानउसकी बात सुनकर सभी लोग हैरान हो गए।

विजय तेंदुलकर का जीवन परिचय

विजय तेंदुलकर का जन्म 6 जनवरी 1928 ई० को महाराष्ट्र के कोल्हापुर में हुआ था। वे प्रसिद्ध मराठी नाटककार, लेखक, पत्रकार और पटकथा लेखक थे। बचपन से ही उन्हें साहित्य और नाटक में गहरी रुचि थी, इसलिए उन्होंने बहुत छोटी उम्र से ही लेखन शुरू कर दिया था। अपने लेखन के माध्यम से उन्होंने समाज की बुराइयों, अन्याय और मानव स्वभाव की कमजोरियों को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया।

विजय तेंदुलकर ने मराठी रंगमंच और भारतीय साहित्य को अनेक महत्वपूर्ण रचनाएँ दीं। उनके प्रसिद्ध नाटकों में ‘घासीराम कोतवाल’, ‘सखाराम बाइंडर’, ‘कमला’, ‘कन्यादान’ आदि शामिल हैं। उन्होंने फिल्मों के लिए भी पटकथा लिखी, जिनमें ‘निशांत’, ‘मंथन’, ‘आक्रोश’ और ‘अर्धसत्य’ जैसी प्रसिद्ध फिल्में शामिल हैं। उनके नाटकों में समाज की वास्तविक समस्याओं और मानवीय भावनाओं का सशक्त चित्रण मिलता है।

साहित्य और रंगमंच के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए उन्हें 1984 ई० में ‘पद्म भूषण’ से सम्मानित किया गया। विजय तेंदुलकर का निधन 19 मई 2008 ई० को पुणे में हुआ। वे भारतीय साहित्य और रंगमंच के एक महान रचनाकार के रूप में आज भी याद किए जाते हैं।

पापा खो गए पाठ का सारांश

यह एकांकी रात के समय समुद्र के किनारे की एक जगह का दृश्य दिखाता है। वहाँ फुटपाथ पर एक बिजली का खंभा, एक पेड़ और एक लेटर बॉक्स खड़े हैं। पास ही धीमी रोशनी में सिनेमा के पोस्टर पर एक नाचने वाली औरत की तस्वीर दिखाई देती है। खंभा और पेड़ आपस में बातें करते हैं। खंभा बरसात की रातों में होने वाली अपनी तकलीफ बताता है। पेड़ भी एक बार अपने ऊपर गिरी बिजली की घटना सुनाता है।

खंभा कहता है कि वह लोहे का बना है, इसलिए उसे बीमारी नहीं होती। पेड़ बताता है कि वह अपने पत्तों का कोट पहनकर सर्दी, गर्मी और बारिश से बचता है। पेड़ यह भी बताता है कि जब उसका जन्म हुआ था, तब वहाँ न सड़क थी, न ऊँचे-ऊँचे घर और न ही सिनेमा का पोस्टर। एक दिन तेज आँधी और बारिश में खंभा गिरकर पेड़ के ऊपर आ पड़ा था। पेड़ ने उसे संभाल लिया। उसी दिन से पेड़ और खंभे में दोस्ती हो गई।

वहाँ रखा लेटर बॉक्स मीठी आवाज में गाना गाता है और मन बहलाने के लिए चिट्ठियाँ पढ़ने लगता है। एक चिट्ठी में एक हेडमास्टर ने किसी अभिभावक को उसके बेटे परीक्षित के बारे में शिकायत लिखी थी कि वह पढ़ाई में कमजोर है और अक्सर कक्षा से गायब होकर खेलता है। पेड़ और खंभा कहते हैं कि किसी की चिट्ठी पढ़ना ठीक नहीं है, लेकिन लेटर बॉक्स कहता है कि वह केवल मन बहलाने के लिए पढ़ता है और किसी की गुप्त बात किसी को नहीं बताता।

इसी बीच एक दुष्ट आदमी, जो बच्चों को चुराता है, एक छोटी लड़की को वहाँ लाकर सुला देता है। उसने उसे बेहोशी की दवा दी होती है, इसलिए वह सोती रहती है। वह आदमी खाना लेने के लिए कहीं चला जाता है। तब खंभा, पेड़, लेटर बॉक्स और एक कौआ आपस में बात करते हैं और सोचते हैं कि जब वह आदमी वापस आएगा तो बच्ची का क्या होगा।

कुछ देर बाद लड़की धीरे-धीरे जाग जाती है। वह अपने पापा और मम्मी को ढूँढ़ने लगती है और डर जाती है। लेटर बॉक्स उससे बात करता है। लड़की बताती है कि उसका घर एक सड़क की गली में है, लेकिन उसे उस गली या सड़क का नाम नहीं मालूम। इसलिए वह अपना सही पता नहीं बता पाती। लेटर बॉक्स उसे बताता है कि ये सभी चीजें अकेले में आपस में बातें करती हैं, लेकिन लोग समझते हैं कि यह सब भूत करते हैं। यह सुनकर लड़की हँसने लगती है और डरना छोड़ देती है।

लड़की पोस्टर पर बनी नाचने वाली को देखकर नाचने लगती है और मज़े से खेलने लगती है। तभी खंभा और पेड़ कहते हैं कि दुष्ट आदमी कभी भी वापस आ सकता है, इसलिए हमें लड़की को बचाने का उपाय करना चाहिए। थोड़ी देर में वह दुष्ट आदमी सच में वापस आ जाता है। लड़की पेड़ के पीछे छिप जाती है। वह आदमी उसे ढूँढ़ने लगता है, लेकिन लड़की बचने की कोशिश करती है।

तभी पेड़, खंभा और लेटर बॉक्स उस आदमी के रास्ते में आकर लड़की की रक्षा करने लगते हैं। लड़की उसके हाथ नहीं लगती। तभी कौआ जोर-जोर से काँव-काँव करने लगता है। पेड़, खंभा और लेटर बॉक्स भी हिलने-डुलने लगते हैं और भूत-भूत चिल्लाने लगते हैं। यह देखकर दुष्ट आदमी डर जाता है और घबराकर वहाँ से भाग जाता है।

इसके बाद सभी लोग लड़की को ढूँढ़ने लगते हैं। उन्हें डर लगता है कि कहीं वह दुष्ट आदमी लड़की को फिर से ले तो नहीं गया। तभी लड़की पोस्टर के पीछे से झाँकती हुई दिखाई देती है। सभी उसे पकड़ने के लिए दौड़ते हैं। अंत में कौआ उसे पकड़ लेता है। थकी हुई लड़की फिर से सो जाती है।

अब सब सोचते हैं कि जब लड़की जागेगी तो कहाँ जाएगी, क्योंकि उसे अपने घर का पता भी नहीं मालूम और वह अपने पापा का नाम भी ठीक से नहीं बता पाती। तब कौआ एक योजना बनाता है। वह कहता है कि सुबह पेड़ लड़की पर अपनी घनी छाया कर देगा और खंभा थोड़ा टेढ़ा होकर खड़ा रहेगा, ताकि लोग समझें कि यहाँ कोई दुर्घटना हुई है। इससे पुलिस आएगी और लड़की को उसके घर पहुँचा देगी।

सुबह होने पर पेड़ लड़की पर छाया करता है, खंभा टेढ़ा होकर खड़ा हो जाता है और कौआ काँव-काँव करके लोगों का ध्यान खींचता है। सिनेमा के पोस्टर पर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा होता है – “पापा खो गए हैं।” लेटर बॉक्स धीरे-धीरे आगे आकर घोषणा करता है – “मैं लाल ताऊ बोल रहा हूँ। अगर किसी को इस प्यारी बच्ची के पापा मिल जाएँ तो उन्हें तुरंत यहाँ ले आइए।”

इस प्रकार सभी मिलकर उस छोटी लड़की की रक्षा करते हैं और उसे उसके पापा से मिलाने का उपाय करते हैं।

शब्दार्थ

शब्दअर्थ
हड़बड़ीउतावलापन
बोरियतमनहूसी
गरूरगर्व, घमंड
कर्कशकठोर, कड़वा
नासपीटादुष्ट, नीच
भंगिमाटेढ़ापन
शोकग्रस्तदुःखी, पीड़ित
प्रेक्षकदर्शक, देखने वाला
एक्सीडेंटदुर्घटना
संतुलनमानसिक शांति
निस्तब्धनिश्चेष्ट
आकृतिआकार
आफतमुसीबत
फोकटमुफ्त
मुमकिनसंभव
निर्जीवबेजान
संरक्षणरक्षा करना, बचाव
स्वीकृतिसहमति
आड़ातिरछा, टेढ़ा
व्याकुलबेचैन
नाक काटनाबेइज्जत होना
गपइधर-उधर की बातें

 

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