संस्कृति पाठ के प्रश्न उत्तर क्लास 7 ॥ Sanskriti Ke Prashn Uttar Class 7

संस्कृति पाठ के प्रश्न उत्तर क्लास 7 ॥ Sanskriti Ke Prashn Uttar Class 7

संस्कृति पाठ के प्रश्न उत्तर क्लास 7 ॥ Sanskriti Ke Prashn Uttar Class 7

वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर :

निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प चुनिए –

प्रश्न 1. लेखक अपने तरीके से क्या समझाने की बात करता है ?
(क) धर्म-अधर्म को
(ख) न्याय-अन्याय को
(ग) संस्कृति और सभ्यता को
(घ) इनमें से कोई नहीं

उत्तर :
(ग) संस्कृति और सभ्यता को

प्रश्न 2. मोती भरा थाल का क्या अभिप्राय है ?
(क) थाल में भरा हुआ मोती
(ख) आकाश में जगमगाते तारे
(ग) घास पर झिलामिलती ओस की बूँदें
(घ) इनमें से कोई नहीं।

उत्तर :
(ख) आकाश में जगमगाते तारे

प्रश्न 3. मानव संस्कृति है –
(क) एक विभाज्य वस्तु
(ख) एक अविभाज्य वस्तु
(ग) अकल्याणकारी वस्तु
(घ) अस्थायी वस्तु

उत्तर :
(ख) एक अविभाज्य वस्तु

लघूत्तरीय प्रश्न

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

प्रश्न 1. संस्कृति क्या है?

उत्तर :
जिस योग्यता, आदत या प्रेरणा की ताकत से कोई व्यक्ति नई चीज़ों का आविष्कार करता है, उसे उस व्यक्ति की संस्कृति कहते हैं।

‘संस्कृति’ शब्द का सीधा अर्थ है – संस्कार या सुधार।

प्रश्न 2. सभ्यता का अभिप्राय स्पष्ट कीजिए।

उत्तर :
सभ्यता, संस्कृति का परिणाम होती है।

हमारे खाने-पीने के तरीके, पहनने-ओढ़ने का ढंग, आने-जाने के साधन और एक-दूसरे से मिलने-जुलने तथा व्यवहार करने के तरीके — ये सभी हमारी सभ्यता को दिखाते हैं।

प्रश्न 3. संस्कृति पाठ के लेखक का नाम लिखिए।

उत्तर :
‘संस्कृति’ पाठ के लेखक का नाम भदंत आनंद कौसल्यायन है।

प्रश्न 4. मनीषी का क्या तात्पर्य है?

उत्तर :
जो व्यक्ति बुद्धिमान, मेधावी और गहराई से सोचने वाला होता है, उसे मनीषी कहते हैं।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए ।

प्रश्न 1. आग की खोज किन कारणों से हुई?

उत्तर :
आग की खोज का एक मुख्य कारण पेट की भूख थी। जब आग का आविष्कार नहीं हुआ था, तब मनुष्य को भोजन पकाने और ठंड से बचने में कठिनाई होती थी। जिस व्यक्ति ने सबसे पहले आग की खोज की, वह बहुत महान आविष्कारक रहा होगा। उसे भी अपनी भूख और आवश्यकता ने ही आग की खोज करने के लिए प्रेरित किया होगा।

प्रश्न 2. न्यूटन कौन थे? उन्होंने किस सिद्धांत की स्थापना की?

उत्तर :
न्यूटन एक महान वैज्ञानिक थे। वे बहुत बुद्धिमान और खोजी प्रवृत्ति के व्यक्ति थे। उन्होंने गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत की स्थापना की। इस सिद्धांत के अनुसार पृथ्वी हर वस्तु को अपनी ओर खींचती है, इसी कारण वस्तुएँ ऊपर से नीचे गिरती हैं।

प्रश्न 3. संस्कृत व्यक्ति किसे कहा जाता है?

उत्तर :
जो व्यक्ति अपनी बुद्धि और समझ का उपयोग करके मानव के भले के लिए कोई नई खोज करता है, उसे संस्कृत व्यक्ति कहा जाता है।

प्रश्न 4. सिद्धार्थ ने अपना घर क्यों त्याग दिया?

उत्तर :
गौतम बुद्ध (सिद्धार्थ) ने अपना घर इसलिए छोड़ दिया क्योंकि वे मानव जीवन के दुखों का कारण जानना चाहते थे। वे चाहते थे कि लोभ और तृष्णा के कारण जो लोग आपस में लड़ते-झगड़ते हैं, उन्हें सच्चा सुख और शांति मिल सके। इसलिए उन्होंने मानवता के कल्याण के लिए घर त्याग दिया।

प्रश्न 5. संस्कृति और सभ्यता में मौलिक अन्तर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर :
संस्कृति और सभ्यता में मूल अंतर यह है कि संस्कृति हमारे विचारों, संस्कारों और गुणों से जुड़ी होती है, जबकि सभ्यता उन विचारों का बाहरी रूप होती है। संस्कृति वह योग्यता, प्रवृत्ति और प्रेरणा है जिससे कोई नई खोज या अच्छा कार्य होता है। उस खोज या कार्य का जो दिखाई देने वाला रूप होता है, उसे सभ्यता कहते हैं। इस प्रकार, संस्कृति अंदर की सोच है और सभ्यता उसका बाहरी परिणाम है।

निर्देशानुसार उत्तर दीजिए-

(क) जिस व्यक्ति में पहली चीज, जितनी अधिक व जैसी परिष्कृत मात्रा में होगी, वह व्यक्ति उतना ही अधिक एवं वैसा ही परिष्कृत आविष्कर्ता होगा।

प्रश्न 1. यह पंक्ति किस पाठ से उद्धृत है? पहली चीज़ का आशय स्पष्ट कीजिए।

उत्तर :
यह पंक्ति ‘संस्कृति’ पाठ से उद्धृत है। ‘पहली चीज़’ से आशय उस शक्ति या प्रेरणा से है, जिसके कारण किसी व्यक्ति ने सबसे पहले आग का आविष्कार किया। पहले उसके मन में आग खोजने की इच्छा और विचार आया होगा, फिर उसने प्रयास करके उसका आविष्कार किया होगा।

प्रश्न 2. प्रस्तुत पंक्ति की व्याख्या कीजिए।

उत्तर :
लेखक कहना चाहते हैं कि जब किसी व्यक्ति के अंदर योग्यता होती है, तभी वह प्रेरणा मिलने पर कोई नई खोज या आविष्कार कर सकता है। यदि किसी व्यक्ति की योग्यता और प्रेरणा अच्छी और श्रेष्ठ होगी, तो वह और भी अच्छी तथा उपयोगी खोज कर सकेगा। इसलिए सफलता के लिए योग्यता और प्रेरणा दोनों का होना आवश्यक है।

(ख) ‘संस्कृति’ का यदि मानव कल्याण से नाता टूट जाएगा तो वह असंस्कृति होकर रहेगी और ऐसी संस्कृति का अवश्यंभावी परिणाम असभ्यता के अतिरिक्त दूसरा क्या होगा?

प्रश्न 1. असंस्कृति और असभ्यता का तात्पर्य स्पष्ट कीजिए।

उत्तर :
मानव की वह योग्यता, जो उसे अपने ही विनाश के साधन बनाने के लिए प्रेरित करती है, उसे असंस्कृति कहते हैं। और जिन साधनों के सहारे वह दिन-रात अपने ही नुकसान या विनाश के काम करता रहता है, उसे असभ्यता कहते हैं।

भाषा-बोध

1. निम्नलिखित शब्दों से उपसर्ग और मूल शब्द पृथक कीजिए :

शब्दउपसर्गमूल शब्द
उपयोगउपयोग
अनेकअनएक
प्रवृत्तिप्रवृत्ति
अपरिचितपरिचित
महानायकमहानायक
अविभाज्यविभाज्य

 

2. निम्नलिखित शब्दों से प्रत्यय पृथक कीजिए :

शब्दमूल शब्दप्रत्यय
सभ्यतासभ्यता
योग्यतायोग्यता
पूर्वजपूर्व
मानवतामानवता
रक्षणीयरक्षअणीय
आध्यात्मिकअध्यात्मइक

 

3. निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखिए :

1. कपड़ा – वस्त्र, परिधान, वसन
2. बुद्धि – मति, मेधा, विवेक
3. जननी – माता, माँ, अंबा
4. अंश – भाग, हिस्सा, खंड

4. निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिए :

शब्दविलोम शब्द
एकअनेक
बड़ाछोटा
अनायासआयास
अपेक्षाउपेक्षा
प्रथमअंतिम
कल्याणअकल्याण

 

5. निम्नलिखित शब्दों का वाक्य में प्रयोग कीजिए :

  1. आविष्कर्ता – थॉमस एडिसन एक महान आविष्कर्ता थे।
  2. संस्कृति – भारत की संस्कृति बहुत प्राचीन और समृद्ध है।
  3. परिष्कृत – हमें अपनी भाषा को परिष्कृत और शुद्ध रखना चाहिए।
  4. संसार – संसार में प्रेम और शांति का होना बहुत आवश्यक है।

भदंत आनंद कौसल्यायन का जीवन परिचय Bhadant Anand Kausalyayan 

जन्म : 5 जनवरी 1905
जन्म स्थान : सोहना गाँव, अंबाला जिला, पंजाब (अविभाजित भारत)
मृत्यु : 22 जून 1988, नागपुर (उम्र 83 वर्ष)
राष्ट्रीयता : भारतीय
पेशा : लेखक, निबंधकार, विद्वान, बौद्ध भिक्षु

प्रारम्भिक जीवन

भदंत आनंद कौसल्यायन का जन्म एक खत्री परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम लाला रामशरण दास था, जो अंबाला में अध्यापक थे। उनका बचपन का नाम हरिनाम था। वे बचपन से ही मेधावी और अध्ययनशील थे। उन्होंने 1920 में दसवीं की परीक्षा उत्तीर्ण की और 1924 में मात्र 19 वर्ष की आयु में स्नातक की परीक्षा पास की। लाहौर में रहते समय वे उर्दू में भी लेखन करते थे।

बौद्ध भिक्षु जीवन और कार्य

वे आगे चलकर श्रीलंका गए और वहाँ बौद्ध भिक्षु बने। वे पालि भाषा के महान विद्वान थे। उन्होंने जीवनभर बौद्ध धर्म और समतामूलक समाज का प्रचार-प्रसार किया। वे 10 वर्षों तक राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा के प्रधानमंत्री (प्रधान पदाधिकारी) रहे। श्रीलंका की विद्यालंकार विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग के अध्यक्ष भी रहे। वे भारत के स्वतंत्रता आंदोलन से भी जुड़े रहे और सामाजिक परिवर्तन के पक्षधर थे। वे डॉ. भीमराव आंबेडकर और महापंडित राहुल सांकृत्यायन से प्रभावित थे।

साहित्यिक योगदान

भदंत आनंद कौसल्यायन ने अनेक महत्वपूर्ण ग्रंथों की रचना और अनुवाद किया।

उन्होंने पाली त्रिपिटक और जातक कथाओं का हिंदी में अनुवाद किया।
डॉ. आंबेडकर की पुस्तक “The Buddha and His Dhamma” का हिंदी और पंजाबी में अनुवाद भी किया।

उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं :

  • यदि बाबा न होते
  • कहाँ क्या देखा
  • संस्कृति
  • भिक्खु के पत्र
  • जो भूल न सका
  • बौद्ध धर्म : एक बुद्धिवादी अध्ययन
  • मनुस्मृति क्यों जलाई गई?
  • राम की कहानी, राम की जुबानी
  • भगवान बुद्ध और उनके अनुचर
  • आवश्यक पालि
  • पालि शब्दकोश

उन्होंने धम्मपद, अंगुत्तर निकाय और अनेक पालि ग्रंथों का अनुवाद किया।

वे बीसवीं सदी में बौद्ध धर्म के सबसे सक्रिय और प्रभावशाली व्यक्तियों में गिने जाते हैं। उनका जीवन ज्ञान, समानता और मानवता के लिए समर्पित था। वे एक महान विचारक, लेखक और समाज सुधारक थे।

22 जून 1988 को नागपुर में उनका महापरिनिर्वाण हुआ।

भदंत आनंद कौसल्यायन एक महान बौद्ध भिक्षु, विद्वान और लेखक थे। उन्होंने अपने ज्ञान और लेखन के माध्यम से समाज को नई दिशा दी। उनका जीवन हमें समानता, शिक्षा और मानव सेवा की प्रेरणा देता है।

‘संस्कृति’ पाठ का सारांश

इस पाठ में लेखक ने बताया है कि ‘सभ्यता’ और ‘संस्कृति’ ऐसे शब्द हैं जिनका प्रयोग तो बहुत होता है, पर उनका सही अर्थ कम लोग समझते हैं। लेखक इन दोनों के अंतर को सरल उदाहरणों से स्पष्ट करते हैं।

लेखक कहते हैं कि जब मानव ने पहली बार आग या सुई-धागे का आविष्कार किया, तब उस आविष्कार के पीछे जो शक्ति, योग्यता और प्रेरणा थी, वही संस्कृति है। और उस योग्यता से जो वस्तु बनी, जैसे आग जलाना या कपड़ा सिलना, वह सभ्यता है।

अर्थात् –

  • संस्कृति व्यक्ति के अंदर की सोच, बुद्धि, प्रेरणा और गुण है।
  • सभ्यता उस सोच और प्रेरणा का बाहरी परिणाम है।

लेखक उदाहरण देते हैं कि Isaac Newton ने गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत खोजा। वे संस्कृत व्यक्ति थे। आज का विद्यार्थी उस सिद्धांत को पढ़ लेता है, इसलिए वह सभ्य तो कहलाएगा, पर न्यूटन जितना संस्कृत नहीं।

लेखक आगे बताते हैं कि संस्कृति केवल भौतिक आवश्यकताओं (जैसे भूख या वस्त्र) से ही नहीं बनती, बल्कि ज्ञान की इच्छा, दूसरों की भलाई की भावना और त्याग से भी बनती है। जो व्यक्ति दूसरों के लिए त्याग करता है, वह भी सच्ची संस्कृति का परिचय देता है। उदाहरण के रूप में Gautama Buddha (सिद्धार्थ) ने मानवता के सुख के लिए अपना घर त्याग दिया।

लेखक कहते हैं कि सभ्यता, संस्कृति का परिणाम है। हमारे खाने-पीने, पहनने, आने-जाने और व्यवहार के तरीके हमारी सभ्यता को दर्शाते हैं।

यदि संस्कृति का संबंध मानव के कल्याण से टूट जाए, तो वह असंस्कृति बन जाती है और उसका परिणाम असभ्यता होता है।

अंत में लेखक निष्कर्ष देते हैं कि मानव संस्कृति एक अविभाज्य वस्तु है और उसमें जो अंश कल्याणकारी है, वही श्रेष्ठ और स्थायी है। सच्ची संस्कृति वही है जो मानव के हित और कल्याण के लिए हो।

‘संस्कृति’ पाठ के कठिन शब्दों के शब्दार्थ

  1. सभ्यता – रहन-सहन और व्यवहार का बाहरी रूप
  2. संस्कृति – अच्छे संस्कार, सोच और प्रेरणा
  3. आविष्कार – नई चीज़ की खोज
  4. आविष्कर्ता – खोज करने वाला व्यक्ति
  5. प्रवृत्ति – स्वभाव या झुकाव
  6. प्रेरणा – भीतर से मिलने वाली शक्ति या उत्साह
  7. परिष्कृत – सुधरा हुआ, निखरा हुआ
  8. अनायास – बिना प्रयास के, स्वयं ही
  9. विवेक – सही-गलत समझने की शक्ति
  10. मनीषी – बुद्धिमान और गहराई से सोचने वाला व्यक्ति
  11. ज्ञानेप्सा – ज्ञान पाने की इच्छा
  12. तृष्णा – अधिक पाने की लालसा
  13. अविभाज्य – जिसे बाँटा न जा सके
  14. असंस्कृति – बुरी या विनाशकारी सोच
  15. असभ्यता – अनुचित या अमानवीय व्यवहार
  16. अवश्यंभावी – जो निश्चित रूप से होने वाला हो
  17. प्रज्ञा – गहरी बुद्धि
  18. मैत्री भाव – मित्रता और प्रेम की भावना
  19. रक्षणीय – जिसकी रक्षा की जानी चाहिए
  20. पूर्वज – पहले के लोग, हमारे बुजुर्ग
  21. विशेषण – किसी शब्द की विशेषता बताने वाला शब्द
  22. आध्यात्मिक – आत्मा या भीतर की भावना से संबंधित
  23. भौतिक – शरीर या वस्तुओं से संबंधित
  24. साक्षात – सीधे रूप में, प्रत्यक्ष
  25. परिचय – जान-पहचान
  26. दर्शन – देखना या गहराई से समझना
  27. अपरिचित – जो जाना-पहचाना न हो
  28. शीतोष्ण – सर्दी और गर्मी
  29. जगमगाते – चमकते हुए
  30. स्थूल – मोटा या बाहरी रूप से दिखाई देने वाला
  31. प्रधान – मुख्य या सबसे महत्वपूर्ण
  32. पुरस्कर्ता – शुरुआत करने वाला
  33. भाग्यविधाता – भाग्य बनाने वाला व्यक्ति
  34. त्याग – किसी चीज़ को छोड़ देना
  35. सर्वस्व – सब कुछ
  36. समतामूलक – समानता पर आधारित
  37. दलबंदी – समूह बनाकर अलग-अलग हो जाना
  38. क्षण-क्षण – हर पल
  39. अंश – हिस्सा
  40. अकल्याणकारी – हानि पहुँचाने वाला

इसे भी पढ़ें 

Leave a Comment