वारिस कहानी का प्रश्न उत्तर क्लास 7 ॥ Varis Kahani Ka Questions Answers Class 7

वस्तुनिष्ठ प्रश्न:
निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प चुनिए –
प्रश्न 1. मास्टरजी बच्चों को कितने बजे पढ़ाने पहुँचते थे?
(क) चार बजे
(ख) पाँच बजे
(ग) तीन बजे
(घ) एक बजे
उत्तर :
(ग) तीन बजे
प्रश्न 2. मैं घड़ी की ओर किस प्रकार देखता?
(क) ऊबकर
(ख) खीझकर
(ग) चौंककर
(घ) उदास होकर
उत्तर :
(क) ऊबकर
प्रश्न 3. मास्टर जी चार सप्ताह किस बीमारी में पड़े रहे?
(क) टायफाइड
(ख) मलेरिया
(ग) पीलिया
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) टायफाइड
लघूत्तरीय प्रश्न
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
प्रश्न 1. मास्टर जी के आने पर सीढ़ियों पर क्या होती थी?
उत्तर :
मास्टर जी के आने पर सीढ़ियों पर खट-खट की आवाज़ सुनाई देती थी।
प्रश्न 2. मास्टरजी बच्चों को कहाँ पढ़ाते थे?
उत्तर :
मास्टरजी बच्चों को बैठकखाने में पढ़ाते थे।
प्रश्न 3. बच्चों को किस कक्षा की परीक्षा देनी थी?
उत्तर :
बच्चों को मैट्रिक की परीक्षा देनी थी।
प्रश्न 4. मास्टर जी कहाँ रहते थे?
उत्तर :
मास्टर जी बच्चों के घर से थोड़ी दूर एक गंदी-सी गली में चार रुपये महीने के किराये पर एक कोठरी में रहते थे।
प्रश्न 5. मास्टरजी की देखभाल के लिए किसकी ड्यूटी लगाई गई थी?
उत्तर :
मास्टरजी की देखभाल के लिए लड़की के भाई की ड्यूटी लगाई गई थी।
बोधमूलक प्रश्न:
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
प्रश्न 1. मास्टरजी ने बच्चों को बंगला पढ़ाना क्यों छोड़ दिया?
उत्तर :
मास्टर जी बच्चों की पढ़ाई से खुश नहीं थे। वे बच्चों की प्रगति से निराश हो गए थे, इसलिए उन्होंने बंगला पढ़ाना छोड़ दिया।
प्रश्न 2. मास्टरजी का गला क्यों भर्रा गया?
उत्तर :
बच्चों के पिता ने बच्चों से कह दिया था कि अंग्रेजी ‘बी’ की परीक्षा के बाद मास्टर जी पढ़ाने नहीं आएँगे। यह बात सुनकर मास्टर जी भावुक हो गए और उनका गला भर्रा गया।
प्रश्न 3. मास्टरजी ने कलम देते हुए क्या कहा?
उत्तर :
मास्टरजी ने कलम देते हुए बच्चे से कहा कि अब उन्हें इसकी ज़रूरत नहीं है। तुम इसे अपने पास रख लो या चाहो तो फेंक देना।
प्रश्न 4. मास्टरजी की आँखें क्यों भर आई?
उत्तर :
मास्टरजी बच्चों से बहुत स्नेह करते थे। जब वे बच्चे को अपनी पुरानी-सी कलम देकर वहाँ से जाने लगे, तो उनके मन में बहुत दुख और प्यार उमड़ आया। इसी कारण उनकी आँखें भर आईं।
प्रश्न 5. मास्टरजी की चारित्रिक विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर :
मास्टरजी के स्वभाव में स्नेह और त्याग की भावना थी। वे बहुत स्वाभिमानी थे और कभी किसी के सामने हाथ नहीं फैलाते थे। पैसों की कमी होने पर भी वे किसी से खैरात नहीं लेते थे, बल्कि मेहनत करके ही अपना गुज़ारा करते थे।
वे दोनों बच्चों को बड़ी लगन और मेहनत से पढ़ाते थे। उन्हें अपने विषय का अच्छा ज्ञान था। वे अधिक धन कमाने के इच्छुक नहीं थे, इसलिए उन्होंने और कोई ट्यूशन नहीं लिया। उनका रहन-सहन और खान-पान बहुत साधारण था। वे सादा जीवन जीते थे, लेकिन बच्चों से बहुत प्रेम और ममता रखते थे।
यथानिर्देश उत्तर दीजिए –
(क) ‘मैं आँखों ही आँखों से उसकी खुमद कर लेता’
प्रश्न 1. प्रस्तुत पंक्ति के लेखक कौन हैं? यह पंक्ति किस पाठ से उद्धृत है?
उत्तर :
प्रस्तुत पंक्ति के लेखक श्री मोहन राकेश हैं। यह पंक्ति ‘वारिस’ पाठ से उद्धृत है।
प्रश्न 2. खुशामद का क्या अर्थ है?
उत्तर :
खुशामद का अर्थ किसी की चापलूसी करना या चाटुकारिता करना है।
प्रश्न 3. कौन किसकी खुशामद करता है और क्यों?
उत्तर :
भाई अपनी बहन की खुशामद करता था। जब मास्टरजी पाँच बजे तक पढ़ाते रहते, तो भाई ऊब जाता था और जम्हाइयाँ लेता हुआ घड़ी की ओर देखता था। तब बहन उसे आँखों के इशारे से ऐसा करने से मना करती और शिकायत करने की धमकी देती। इसी कारण भाई आँखों ही आँखों में उसकी खुशामद करता था।
(ख) ‘उनकी आँखें भर आई थी।’
प्रश्न 1. ‘उनकी’ शब्द का प्रयोग किसके लिए किया गया है?
उत्तर :
‘उनकी’ शब्द का प्रयोग मास्टरजी के लिए किया गया है।
प्रश्न 2. संकेतित व्यक्ति की आँखें क्यों भर आई थीं?
उत्तर :
मास्टरजी के मन में बच्चों के प्रति बहुत स्नेह और ममता थी। जब वे उनसे विदा होने लगे, तो उनका मन दुख से भर गया। इसी कारण उनकी आँखें भर आई थीं।
भाषा बोध
1. निम्नलिखित शब्दों से उपसर्ग एवं मूल शब्द पृथक कीजिए –
- अनिश्चित
- उपसर्ग : अन
- मूल शब्द : निश्चित
- दुर्गंध
- उपसर्ग : दुर् (दु)
- मूल शब्द : गंध
2. निम्नलिखित शब्दों से प्रत्यय पृथक कीजिए –
- सीढ़ियों
- मूल शब्द : सीढ़ी
- प्रत्यय : यों
किताबें
- मूल शब्द : किताब
- प्रत्यय : ए
- खुशी
- मूल शब्द : खुश
- प्रत्यय : ई
- उत्सुकता
- मूल शब्द : उत्सुक
- प्रत्यय : ता
3. निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द –
- निश्चित — अनिश्चित
- निराश — आशावान
4. निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ और वाक्य में प्रयोग –
- आँखों ही आँखों से खुशामद करना
- अर्थ : बिना बोले इशारे से मनाना या प्रसन्न करने की कोशिश करना।
- वाक्य : राहुल अपनी बहन को आँखों ही आँखों से खुशामद कर रहा था ताकि वह उसकी शिकायत न करे।
- डरी हुई नजर से देखना
- अर्थ : भयभीत होकर देखना।
- वाक्य : बच्चा शिक्षक को डरी हुई नजर से देख रहा था।
- दिल उछलना
- अर्थ : बहुत खुशी होना।
- वाक्य : परीक्षा में अच्छे अंक देखकर उसका दिल उछल पड़ा।
- आँख लगना
- अर्थ : हल्की नींद आ जाना।
- वाक्य : पढ़ते-पढ़ते उसकी आँख लग गई।
- सर पर हाथ फेरना
- अर्थ : प्यार करना या दुलार करना।
- वाक्य : माँ ने बच्चे के सिर पर हाथ फेरकर उसे समझाया।
- दिमाग फटना
- अर्थ : बहुत अधिक परेशान या क्रोधित होना।
- वाक्य : शोर-शराबे से उसका दिमाग फटने लगा।
- दम साधना
- अर्थ : चुपचाप प्रतीक्षा करना या साँस रोककर रहना।
- वाक्य : सभी लोग परिणाम सुनने के लिए दम साधे बैठे थे।
5. इस पाठ में वण्डरफुल, ट्यूशन जैसे अंग्रेजी शब्दों का प्रयोग किया गया है। पाठ में आये अन्य अंग्रेजी के शब्दों को चुनिए और उनका अर्थ लिखिए –
वण्डरफुल (Wonderful) – अद्भुत
मास्टर (Master) – शिक्षक
मैट्रिक (Matric) – दसवीं की परीक्षा
टायफाइड (Typhoid) – मियादी बुखार
डेट शीट (Date Sheet) – दिनांक सूची
पेपर (Paper) – कागज
पेन (Pen) – कलम
नाउन (Noun) – संज्ञा
एडनेक्टिव (Adjective) – विशेषण
ट्यूशन (Tuition) – निजी पढ़ाई / घर पर पढ़ाना
सूप (Soup) – शोरबा
ड्यूटी (Duty) – जिम्मेदारी / कार्य
फाउन्टेन पेन (Fountain Pen) – स्याही वाला कलम
मोहन राकेश का जीवन परिचय
मोहन राकेश आधुनिक हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध और सम्मानित लेखक थे। उनका जन्म 8 जनवरी 1925 को पंजाब के अमृतसर शहर में हुआ था। वे बचपन से ही पढ़ाई में तेज और साहित्य में रुचि रखने वाले छात्र थे। उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय, लाहौर से हिंदी और अंग्रेजी विषय में एम.ए. की डिग्री प्राप्त की। अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने अध्यापक के रूप में कार्य किया। वे जालंधर के डी.ए.वी. कॉलेज में हिंदी विभाग के प्रमुख भी रहे। बाद में उन्होंने प्रसिद्ध साहित्यिक पत्रिका ‘सारिका’ का संपादन किया और साहित्य की सेवा की।
मोहन राकेश ‘नई कहानी आंदोलन’ के प्रमुख लेखकों में से एक थे। उन्होंने अपने नाटकों, कहानियों और उपन्यासों में आधुनिक जीवन, परिवार, रिश्तों और मनुष्य की भावनाओं को सच्चाई के साथ प्रस्तुत किया। उनके प्रसिद्ध नाटकों में आषाढ़ का एक दिन, आधे-अधूरे और लहरों के राजहंस शामिल हैं। उन्होंने हिंदी नाटकों को नई दिशा दी और उन्हें आधुनिक रंगमंच से जोड़ा। उनके उत्कृष्ट साहित्यिक योगदान के लिए उन्हें 1968 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 3 जनवरी 1972 को नई दिल्ली में उनका निधन हो गया, लेकिन उनका साहित्य आज भी लोगों द्वारा पढ़ा और सराहा जाता है।
‘वारिस’ कहानी का सारांश
प्रस्तुत अंश के आधार पर ‘वारिस’ कहानी में एक त्यागी, स्वाभिमानी और समर्पित अध्यापक के चरित्र का मार्मिक चित्रण किया गया है। कहानी का कथानायक अपने मास्टर जी की स्मृतियों को याद करता है।
मास्टर जी प्रतिदिन ठीक तीन बजे लाठी की खट-खट के साथ पढ़ाने आते थे। उनके आने का समय बहुत निश्चित था, पर जाने का समय अनिश्चित रहता था। वे बच्चों को मैट्रिक की परीक्षा के लिए अंग्रेज़ी पढ़ाने आते थे। कथानायक और उसकी बहन दोनों अंग्रेज़ी में कमजोर थे, फिर भी मास्टर जी पूरे उत्साह और लगन से उन्हें पढ़ाते थे। पढ़ाते समय वे समय का ध्यान नहीं रखते थे और कभी-कभी दो घंटे तक पढ़ाते रहते थे। लड़का पढ़ाई के समय ऊब जाता था, जबकि बहन उसे इशारों से समझाती रहती थी।
मास्टर जी बहुत साधारण और स्वाभिमानी व्यक्ति थे। वे तंगी में थे, लेकिन किसी से दान नहीं लेना चाहते थे। वे मेहनत करके कमाना चाहते थे। उनके पास बहुत कम सामान था और वे एक गंदी गली की छोटी-सी कोठरी में रहते थे। एक दिन वे बीमार पड़ गए और उन्हें टाइफाइड हो गया। चार सप्ताह तक वे बीमार रहे। उस समय कथानायक उनकी सेवा करता था और उनकी गरीबी तथा सादगी को करीब से देखता था।
स्वस्थ होने के बाद वे फिर पढ़ाने आने लगे। परीक्षा नज़दीक आने पर पिता जी ने बच्चों से कहला भेजा कि ‘बी’ पेपर तक ही वे पढ़ाएँगे। यह सुनकर मास्टर जी को दुःख हुआ, पर उन्होंने कुछ नहीं कहा। परीक्षा के बाद वे बच्चों से विदा लेने आए। उन्होंने प्रेम से बच्चों के सिर पर हाथ फेरा और जाते समय अपना पुराना फाउंटेन पेन कथानायक को दे दिया। उनकी आँखें नम थीं।
कहानी के अंत में वह पेन भी टूटकर खो जाता है, पर मास्टर जी का स्नेह, त्याग और आदर्श जीवन बच्चों की स्मृति में अमर हो जाता है। इस प्रकार कहानी एक गुरु के स्नेह, आत्मसम्मान और समर्पण को भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत करती है।
‘वारिस’ कहानी में आए कठिन शब्दों के अर्थ
- गेरुआ बाना – साधु जैसा भगवा वस्त्र
- ड्योढ़ी – घर का मुख्य द्वार या प्रवेश स्थान
- शिकायत की नजर – नाराज़गी भरी दृष्टि
- मैट्रिक – दसवीं कक्षा की परीक्षा
- हिज्जे – शब्दों के अक्षरों को अलग-अलग बोलना (स्पेलिंग)
- अनिश्चित – जिसका समय तय न हो
- नाउन (Noun) – संज्ञा, किसी व्यक्ति, स्थान या वस्तु का नाम
- एडनेक्टिव (Adjective) – विशेषण, जो संज्ञा की विशेषता बताए
- जम्हाई – नींद या थकान के कारण मुँह खोलना
- ऊबकर – बोर होकर
- खुशामद – चापलूसी करना
- कुर्सी च्याँ की आवाज – कुर्सी के खिसकने की ध्वनि
- कोठा – घर की छत
- नारा – जोर से बोला जाने वाला वाक्य
- खैरात – दान या मुफ्त में दी गई वस्तु
- ट्यूशन – घर पर पढ़ाने का कार्य
- तंगी – आर्थिक परेशानी
- दम साधकर – साँस रोककर
- निराश – उदास या हताश
- कम्बल – मोटा ऊनी कपड़ा
- टाइफाइड – बुखार की एक गंभीर बीमारी
- ड्यूटी – जिम्मेदारी या कार्य
- वैद्य – आयुर्वेदिक चिकित्सक
- दुर्गन्ध – बदबू
- उत्सुकता – जानने की इच्छा
- चिथड़े – फटे-पुराने कपड़े
- कमंडल – साधुओं का पानी रखने का पात्र
- सम्पत्ति – धन-दौलत या सामान
- त्यौरियाँ चढ़ाना – गुस्सा दिखाना
- भर्रा गया – गला रुँध जाना
- डेट शीट – परीक्षा का कार्यक्रम
- काँपते हाथ – डर या कमजोरी के कारण हिलते हाथ
- फाउन्टेन पेन – स्याही से लिखने वाला पेन
- निब – पेन का अगला हिस्सा जिससे लिखा जाता है
- स्पर्धा – प्रतिस्पर्धा या ईर्ष्या
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