वृन्द के दोहे Class 6 Question Answer ॥ Vrind Ke Dohe Class 6 Question Answer

वृन्द के दोहे Class 6 Question Answer ॥ वृन्द के दोहे का प्रश्न उत्तर Class 6 ॥ Vrind Ke Dohe Class 6 Question Answer

वृन्द के दोहे Class 6 Question Answer ॥ वृन्द के दोहे का प्रश्न उत्तर Class 6 ॥ Vrind Ke Dohe Class 6 Question Answer

वस्तुनिष्ठ प्रश्न: 

प्रश्न 1.
कवि के अनुसार सब लोग किसकी सहायता करते हैं ?

(क) निर्बल की
(ख) सबल की
(ग) दुर्बल की
(घ) इनमें से किसी की नहीं

उत्तर : (ख) सबल की

प्रश्न 2.
हमें दान किसको देना चाहिए ?

(क) हीन को
(ख) प्रवीन को
(ग) दीन को
(घ) किसीं को नहीं

उत्तर : (ग) दीन को

प्रश्न 3.
कौन आग को बढ़ा देता है और दीपक को बुझा देता है ?

(क) पानी
(ख) बादल
(ग) हवा
(घ) वर्षा

उत्तर : (ग) हवा

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
दान किसको देना चाहिए ?

उत्तर :
दान दीन(गरीब) और जरूरतमंद व्यक्ति को देना चाहिए।

प्रश्न 2.
विद्या की प्राप्ति के लिए क्या करना चाहिए ?

उत्तर :
विद्या की प्राप्ति के लिए प्रयत्न, परिश्रम और उद्यम करना चाहिए।

प्रश्न 3.
मीठी बोली बोल कर तोता कहाँ कैद हो जाता है ?

उत्तर :
मीठी बोली बोलकर तोता पिंजड़े में कैद हो जाता है।

प्रश्न 4.
कौन अपनी दुष्टता नहीं छोड़ता है ?

उत्तर :
दुष्ट व्यक्ति अपनी दुष्टता नहीं छोड़ता है।

प्रश्न 5.
विष कौन-सा गुण नहीं त्यागता है ?

उत्तर :
विष अपना काला (श्यामला) गुण नहीं छोड़ता है।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
दुष्ट की दुष्टता का क्या प्रभाव पड़ता है ?

उत्तर :
दुष्ट व्यक्ति अपनी दुष्टता को नहीं छोड़ता। उसे कितना ही बड़ा स्थान मिल जाए या अच्छे लोगों की संगति मिल जाए, फिर भी वह अपनी बुरी आदतें नहीं छोड़ता। जैसे विष अपना स्वाभाविक गुण नहीं छोड़ता, उसी प्रकार दुष्ट व्यक्ति भी अपने बुरा गुण नहीं छोड़ता।

प्रश्न 2.
बिना अवसर की बात कैसी लगती है ?

उत्तर :
बिना अवसर के कही गई अच्छी बात भी बुरी लगती है। जैसे शृंगार की बात सामान्य समय में अच्छी लगती है, लेकिन युद्ध या लड़ाई के समय ऐसी बात अच्छी नहीं लगती। इसलिए हर बात का सही समय होना जरूरी होता है।

निर्देशानुसार उत्तर दीजिए –

प्रश्न 1.
“जाही ते कछु पाइये ………. कैसे बुझत पिआस’

(i) पाठ और कवि का नाम बताइये।

उत्तर :
प्रस्तुत दोहा ‘वृंद के दोहे’ पाठ से लिया गया है। इसके कवि का नाम वृंद है।

(ii) उपर्युक्त अंश की व्याख्या कीजिए।

उत्तर :
इस दोहे में कवि वृंद कहते हैं कि हमें उसी व्यक्ति से आशा करनी चाहिए, जिससे कुछ मिलने की संभावना हो। जो व्यक्ति स्वयं असमर्थ होता है, उससे आशा करने पर निराशा ही मिलती है। जैसे सूखे और बिना पानी वाले सरोवर पर जाने से किसी की प्यास नहीं बुझ सकती।

प्रश्न 2.
“विद्या धन उद्यम बिना ………… ज्यों पंखे का पौन।”

(i) विद्या रूपी धन की प्राप्ति कैसे हो सकती है ?

उत्तर :
विद्या रूपी धन की प्राप्ति प्रयत्न, परिश्रम और उद्यम करने से होती है। जो व्यक्ति आलसी होता है और मेहनत नहीं करता, उसे विद्या नहीं मिलती।

(ii) उपर्युक्त पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए।

उत्तर :
इन पंक्तियों में कवि वृंद कहते हैं कि विद्या केवल मेहनती व्यक्ति को ही मिलती है। जो व्यक्ति प्रयत्न, परिश्रम और उद्यम करता है, वही विद्या रूपी धन प्राप्त कर सकता है। आलसी और काम न करने वाला व्यक्ति विद्या नहीं पा सकता। जैसे हवा पाने के लिए पंखा चलाना पड़ता है, वैसे ही विद्या पाने के लिए मेहनत करना जरूरी होता है।

प्रश्न 3.
“कबहूँ प्रीति न जोरिये ………… गाँठि परति गुन माहि।’

(i) कवि यहाँ क्या नहीं करने को कहता है ?

उत्तर :
कवि यहाँ बिना सोच-समझ के प्रीति (मित्रता) न जोड़ने और जोड़कर उसे तोड़ने से मना करता है।

(ii) इस दोहे से कवि क्या संदेश देना चाहता है ?

उत्तर :
इस दोहे से कवि यह संदेश देना चाहता है कि हमें सोच-समझकर ही प्रीति (मित्रता) करनी चाहिए। यदि किसी से प्रेम या मित्रता करें, तो उसे निभाना चाहिए और उसे तोड़ना नहीं चाहिए। क्योंकि एक बार प्रीति टूट जाती है तो फिर पहले जैसी नहीं रहती। जैसे रस्सी टूटकर दोबारा जोड़ने पर उसमें गाँठ पड़ जाती है, उसी प्रकार टूटे हुए प्रेम में भी संदेह और दूरी आ जाती है।

भाषा बोध – 

(क)निम्नलिखित शब्दों के शुद्ध रूप लिखिए –

सिंगार – शृंगार
पिआस – प्यास
करतब – कर्त्तव्य
पौन – पवन
सबन – सब
प्रीति – प्रीति (प्रेम)

(ख) निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखिए –

अवसर – मौका, समय, अवसर
सरवर – तालाब, पोखर, जलाशय
पवन – हवा, वायु, समीर
आग – अग्नि, ज्वाला, अनल
शरीर – देह, तन, काया

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
वृंद के दोहों से हमें क्या शिक्षा मिलती है?

उत्तर :
वृंद के दोहों से हमें जीवन की कई अच्छी शिक्षाएँ मिलती हैं। कवि बताते हैं कि हमें हमेशा समय और अवसर के अनुसार ही बात करनी चाहिए, क्योंकि बिना समय की कही हुई अच्छी बात भी बुरी लग सकती है। हमें उसी व्यक्ति से आशा रखनी चाहिए जो हमारी सहायता करने में सक्षम हो।

कवि यह भी कहते हैं कि मनुष्य को अपनी क्षमता और साधनों के अनुसार ही काम करना चाहिए। सफलता पाने के लिए प्रयत्न, परिश्रम और उद्यम बहुत जरूरी है। बिना मेहनत के विद्या रूपी धन प्राप्त नहीं हो सकता।

इसके साथ ही कवि सिखाते हैं कि हमें गरीब और जरूरतमंद लोगों को ही दान देना चाहिए। दुष्ट व्यक्ति कभी अपनी बुरी आदतें नहीं छोड़ता। ईश्वर सभी प्राणियों का ध्यान रखते हैं और सबकी रक्षा करते हैं।

अंत में कवि यह शिक्षा देते हैं कि हमें अपने प्रेम और मित्रता के संबंधों को नहीं तोड़ना चाहिए, क्योंकि एक बार टूटने के बाद वे पहले जैसे नहीं रहते। इसलिए हमें प्रेम और संबंधों को संभालकर रखना चाहिए।

प्रश्न 2. वृंद के दोहे का सारांश लिखिए।

वृंद के दोहों में जीवन से जुड़ी बहुत अच्छी और उपयोगी शिक्षाएँ दी गई हैं। कवि बताते हैं कि किसी भी बात को सही समय पर ही कहना चाहिए, क्योंकि बिना अवसर की कही हुई अच्छी बात भी बुरी लगती है। हमें उसी व्यक्ति से आशा रखनी चाहिए जो हमारी सहायता करने में सक्षम हो, क्योंकि सूखे सरोवर से प्यास नहीं बुझ सकती।

कवि यह भी सिखाते हैं कि मनुष्य को अपनी क्षमता और साधनों को देखकर ही काम करना चाहिए। जितनी लंबी चादर हो, उतने ही पैर फैलाने चाहिए। इसी प्रकार विद्या रूपी धन प्राप्त करने के लिए प्रयत्न, परिश्रम और उद्यम करना बहुत जरूरी है। बिना मेहनत के ज्ञान प्राप्त नहीं होता।

कवि कहते हैं कि संसार में अधिकतर लोग शक्तिशाली व्यक्ति की सहायता करते हैं और कमजोर व्यक्ति की कम मदद करते हैं। कभी-कभी किसी का गुण भी उसके लिए परेशानी का कारण बन जाता है, जैसे तोते की मीठी बोली के कारण वह पिंजरे में कैद हो जाता है।

कवि यह भी बताते हैं कि दान हमेशा गरीब और जरूरतमंद व्यक्ति को देना चाहिए। दुष्ट व्यक्ति अपनी बुरी आदतें नहीं छोड़ता, चाहे उसे कितना भी बड़ा स्थान क्यों न मिल जाए।

अंत में कवि कहते हैं कि भगवान सभी प्राणियों की चिंता करते हैं और उनकी देखभाल करते हैं। साथ ही हमें अपने प्रेम और मित्रता के संबंधों को नहीं तोड़ना चाहिए, क्योंकि एक बार टूटने के बाद वे पहले जैसे नहीं रहते।

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