देशप्रेम कविता में निहित कवि के संदेश को लिखें।

देशप्रेम कविता में निहित कवि के संदेश को लिखें। Desh Prem Kavita Me Nihit Sandesh

देशप्रेम कविता में निहित कवि के संदेश को लिखें। Desh Prem Kavita Me Nihit Sandesh

कवयित्री अनामिका की कविता ‘देशप्रेम’ हमें यह सिखाती है कि जन्मभूमि के प्रति प्रेम मनुष्य का स्वाभाविक गुण है। जिस भूमि ने हमें जन्म दिया, पाला और सुरक्षित रखा, उसका सम्मान करना हमारा पहला कर्तव्य है। कवयित्री कहती हैं कि आज के समय में यह भावना दब चुकी है और केवल अवसर विशेष पर ही सामने आती है। उन्होंने इसका सुंदर प्रतीक प्रस्तुत करते हुए देशभक्ति को कोट के फटे अस्तर में छिपे छुट्टे पैसों से तुलना की है, जो कभी-कभी ही हाथ लगते हैं।

कविता में कवयित्री यह भी बताती हैं कि पहले लोगों के दिलों में देशप्रेम प्रबल था। राष्ट्रगान सुनते ही सभी लोग सावधान मुद्रा में खड़े हो जाते थे, सिनेमा हॉल में भी फिल्म के बाद राष्ट्रगान बजता था और लोग पूरे सम्मान के साथ खड़े रहते थे। लेकिन आज के समय में यह भावना औपचारिकता बनकर रह गई है। लोग मोबाइल की रिंगटोन या कॉलरट्यून पर देशभक्ति गीत लगाकर अपने कर्तव्य की इतिश्री मान लेते हैं। यह दिखाता है कि असली देशप्रेम अब धीरे-धीरे कम होता जा रहा है।

इस कविता का संदेश यही है कि हमें अपने अंदर छिपे वास्तविक देशप्रेम को जगाना होगा। देशभक्ति केवल तिरंगे को सलाम करने या गीत सुनने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे जीवन के हर कार्य में दिखाना चाहिए। ईमानदारी, जिम्मेदारी, अनुशासन और त्याग ही सच्चे देशप्रेम के प्रतीक हैं। कवयित्री हमें प्रेरित करती हैं कि हम दिखावटी देशभक्ति से आगे बढ़कर अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करें, तभी मातृभूमि का वास्तविक सम्मान संभव है।

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