इनसे सीखो कविता Question Answer Class 6 ॥ Inse Sikho Kavita Ka Question Answer

इनसे सीखो कविता Question Answer Class 6 ॥ Inse Sikho Kavita Ka Question Answer

इनसे सीखो कविता Question Answer Class 6 ॥ Inse Sikho Kavita Ka Question Answer

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
फूलों से हमें क्या सीखना चाहिए ?

(क) गाना
(ख) पढ़ना
(ग) हँसना
(घ) खिलना

उत्तर : (ग) हँसना।

प्रश्न 2.
दीपक हमें क्या सिखाते हैं ?

(क) जलना
(ख) बुझना
(ग) अंधेरा हरना
(घ) अंधेरा करना

उत्तर : (ग) अंधेरा हरना। 

प्रश्न 3.
पृथ्वी से हमें क्या शिक्षा लेनी चाहिए ?

(क) सच्ची सेवा करना
(ख) झगड़ा करना
(ग) कष्ट सहना
(घ) इनमें से कोई नहीं

उत्तर : (क) सच्ची सेवा करना।

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
पेड़ की झुकी डालियाँ हमें क्या सिखाती हैं ?

उत्तर : पेड़ की झुकी डालियाँ हमें विनम्र होना और दूसरों के प्रति आदर दिखाना सिखाती हैं।

प्रश्न 2.
सूरज की किरणें हमें क्या शिक्षा देती हैं ?

उत्तर : सूरज की किरणें हमें जागने और दूसरों को जगाने की शिक्षा देती हैं।

प्रश्न 3.
अपने गुरु से हमें क्या सीखनी चाहिए ?

उत्तर : अपने गुरु से हमें उत्तम विद्या सीखनी चाहिए।

प्रश्न 4.
हमारा चरित्र कौन गढ़ता है ?

उत्तर : सत्पुरुषों का आदर्श जीवन हमारा चरित्र गढ़ता है।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
हमारे जीवन में सत्पुरुष और गुरु का क्या योगदान है ? स्पष्ट करें।

उत्तर : सत्पुरुष और गुरु का हमारे जीवन में बहुत बड़ा योगदान हैं। सत्पुरुषों के अच्छे जीवन से हमें सही व्यवहार और अच्छे चरित्र की शिक्षा मिलती है। गुरु हमें अच्छी शिक्षा और ज्ञान देते हैं। बिना शिक्षा के हम जीवन में आगे नहीं बढ़ सकते। इसलिए गुरु और सत्पुरुष हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।

प्रश्न 2.
दीपक की क्या विशेषता है ? हमें उससे क्या शिक्षा लेनी चाहिए ?

उत्तर : दीपक अपनी रोशनी से आस-पास के अंधकार को दूर कर प्रकाश फैलाता है। हमें दीपक से यह शिक्षा लेनी चाहिए कि हम भी अपने प्रयास से अपने आस-पास के अंधकार को दूर करें। लोगों के मन के अज्ञान और अशिक्षा को दूर करके उनके जीवन में ज्ञान और उजाला फैलाएँ।

प्रश्न 3.
‘इनसे सीखो’ कविता का मूल भाव स्पष्ट कीजिए।

उत्तर : ‘इनसे सीखो’ कविता में कवि ने बच्चों को अपने आस-पास की चीज़ों और व्यक्तियों से सीखने की प्रेरणा दी है। कवि चाहते हैं कि बच्चे फूलों से हँसना और खुश रहना सीखें, वृक्ष की झुकी डालियों से विनम्र होना सीखें, सूर्य की किरणों से सुबह उठने और दूसरों को जागाने की आदत अपनाएँ। लताओं और वृक्षों से दूसरों से प्रेम करना सीखें, दीपक से अंधकार दूर करना और पृथ्वी से सभी प्राणियों की सेवा करना सीखें। जल की धारा से जीवन में आगे बढ़ना और धुएँ से ऊँचाई प्राप्त करना सीखें। सज्जनों के जीवन से चरित्र निर्माण और गुरु से उत्तम विद्या ग्रहण करना सीखें। इस प्रकार, इन सभी से सीखकर बच्चे अपने जीवन में उन्नति कर सकते हैं।

प्रश्न 4.
‘इनसे सीखो’ कविता में किस-किस से क्या सीखने की प्रेरणा दी गई है?

उत्तर : ‘इनसे सीखो’ कविता में बच्चों को फूलों, भौरों, पेड़ की डालियों, सूर्य की किरणों, लताओं और पेड़ों, दीपक और पृथ्वी, जलधारा, धुएँ, सज्जन पुरुष और अपने गुरु से सीखने की प्रेरणा दी गई है। फूलों से हँसना, भौरों से गुनगुनाना, पेड़ की डालियों से सिर झुकाना, सूर्य की किरणों से सुबह जागना और दूसरों को जगाना, लताओं और पेड़ों से प्रेम और अपनापन दिखाना, दीपक से अंधेरा दूर करना, पृथ्वी से जीवों की सेवा करना, जलधारा से जीवन में आगे बढ़ना, धुएँ से ऊँचाई पर चढ़ना, सज्जन पुरुषों से अच्छा चरित्र बनाना और गुरु से अच्छी पढ़ाई सीखना बच्चों के लिए मुख्य शिक्षा हैं।

निर्देशानुसार उत्तर दीजिए –

(क) फूलों से नित …………. सीखो शीश झुकाना।

(i) पाठ और कवि का नाम लिखिए।

उत्तर : प्रस्तुत पंक्तियाँ ‘इनसे सीखो’ पाठ से हैं। इसके कवि श्रीधर पाठक हैं।

(ii) उपर्युक्त पंक्तियों का अर्थ स्पष्ट कीजिए।

उत्तर : इन पंक्तियों का अर्थ है कि बच्चों को अपने चारों ओर की चीज़ों से सीखना चाहिए। फूलों की तरह हमेशा हँसना और खुश रहना सीखो। भौरों की तरह हमेशा गुनगुनाना और खुश रहना सीखो। पेड़ की झुकी हुई डालियों की तरह विनम्रता और दूसरों के प्रति आदर दिखाना सीखो। ये पंक्तियाँ हमें सरल, सजीव और सकारात्मक जीवन जीने की शिक्षा देती हैं।

(ख) जलधारा से सीखो ………… ऊँचे पर ही चढ़ना।

(i) जीवन पथ से कवि का क्या तात्पर्य है ?

उत्तर : जीवन-पथ का तात्पर्य जिंदगी का रास्ता है। कवि का कहना है कि व्यक्ति को अपने जीवन में हमेशा अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहना चाहिए। जैसे जल की धारा कभी नहीं रुकती और लगातार अपने रास्ते पर बढ़ती रहती है, वैसे ही मनुष्य को भी हमेशा आगे बढ़ते रहना चाहिए।

(ii) उपर्युक्त पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए।

उत्तर : इन पंक्तियों का भाव है कि हमें जलधारा की तरह जीवन में हमेशा आगे बढ़ना सीखना चाहिए। जैसे जलधारा कभी रुकती नहीं और निरंतर बहती रहती है, वैसे ही हमें भी जीवन में मेहनत और प्रयास करते रहना चाहिए। साथ ही, धुएँ की तरह हमेशा ऊपर उठने और ऊँचाई प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए। यह हमें जीवन में प्रगति और सफलता की प्रेरणा देता है।

भाषा बोध – 

प्रश्न : क) निम्नलिखित शब्दों के तीन-तीन पर्यायवाची शब्द लिखिए –

1. फूल – पुष्प, सुमन, कुसुम।

2. भौरा – भ्रमर, मधुप, मधुकर।

3. वृक्ष – पेड़, तरु, पादप।

4. गुरु – शिक्षक, आचार्य, अध्यापक।

5. सूरज – सूर्य, रवि, भानु।

प्रश्न : ख) निम्नलिखित शब्दों से प्रत्यय अलग कीजिए –

1. हँसना – हँस + ना
2. झुकाना – झुका + ना
3. जगाना – जगा + ना
4. बढ़ना – बढ़ + ना
5. पढ़ना – पढ़ + ना

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न : 1
‘इनसे सीखो’ कविता से हमें क्या शिक्षा मिलती है?

उत्तर : सुकवि श्रीधर पाठक ने इस कविता में सरल और सुंदर तरीके से हमें जीवन में सीखने योग्य बातें बताई हैं। हमें विनम्रता, सद्भावना, सेवा, सहानुभूति और सही शिक्षा लेकर जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। जैसे फूल हमेशा हँसते हैं, वैसे ही हमें भी सदा प्रसन्नचित्त रहना चाहिए। भौरों की तरह हमें भी खुश रहकर गुनगुनाना चाहिए। वृक्ष की झुकी डालियाँ हमें विनम्रता और सिर झुकाना सिखाती हैं। सूर्य की किरणें हमें जागने और दूसरों को जागृत करने की शिक्षा देती हैं। लताओं और वृक्षों से हमें प्रेम और अपनापन सीखना चाहिए। दीपक अपने प्रकाश से अंधकार दूर करता है, हमें भी दूसरों के जीवन में उजाला फैलाना चाहिए। पृथ्वी सभी जीवों की सेवा करती है, हमें भी सभी प्राणियों की सेवा करनी चाहिए। कवि ने हमें जलधारा और धुएँ के माध्यम से जीवन में लगातार आगे बढ़ने और ऊँचाई प्राप्त करने की प्रेरणा दी है। इस प्रकार, कविता हमें अच्छे व्यवहार, सेवा भाव और जीवन में निरंतर प्रगति करने की शिक्षा देती है।

इनसे सीखो कविता का सारांश

कविता ‘इनसे सीखो’ बच्चों को जीवन में अच्छे संस्कार और गुण सीखने की प्रेरणा देती है। कवि ने इसमें प्रकृति, वस्तुएँ और सज्जन व्यक्तियों के उदाहरण देकर बच्चों को यह समझाया है कि वे जीवन में हमेशा खुश, विनम्र, प्रेमपूर्ण और ज्ञान के प्रति उत्साही बने रहें। प्रत्येक प्राकृतिक वस्तु और व्यक्ति बच्चों के लिए एक शिक्षक की तरह है, जिससे वे जीवन की महत्वपूर्ण सीख ले सकते हैं।

कविता के पहले पद में कवि ने फूल, भौंरे और वृक्ष की झुकी डालियों का उदाहरण दिया है। फूल हमेशा हँसते हैं और अपने चारों ओर खुशियाँ फैलाते हैं। इससे बच्चों को यह शिक्षा मिलती है कि उन्हें भी हमेशा प्रसन्नचित्त और खुश रहना चाहिए। भौंरे फूलों के पास गुनगुनाते रहते हैं, इसलिए बच्चों को भी गाते-गुनगुनाते रहना चाहिए और जीवन में आनंदित रहना चाहिए। वृक्ष की झुकी हुई डालियाँ विनम्रता का प्रतीक हैं। बच्चों को यह सीखना चाहिए कि वे हमेशा नम्र और सज्जन बने रहें, किसी से ऊँच-नीच की भावना न रखें।

दूसरे पद में सूर्य और लता- वनों का उदाहरण दिया गया है। सूर्य की किरणें सुबह होते ही फैलती हैं और सबको जगाती हैं। इससे बच्चों को यह सीख मिलती है कि वे समय पर जागें और दूसरों को भी प्रेरित करें। लता और वृक्ष आपस में प्रेम से लिपटते हैं। इससे यह शिक्षा मिलती है कि बच्चों को भी अपने मित्रों, परिवार और समाज के साथ स्नेहपूर्वक व्यवहार करना चाहिए।

तीसरे और चौथे पद में दीपक, पृथ्वी, जलधारा और धुएँ से सीखने की बात कही गई है। दीपक अपने चारों ओर अंधकार दूर करके प्रकाश फैलाता है। बच्चों को भी अपने अच्छे कार्यों और विचारों से बुराइयों और अज्ञान को दूर करने का प्रयास करना चाहिए। पृथ्वी सभी जीवों की सेवा करती है, जिससे बच्चों को सभी लोगों और जीवों की मदद करने और सेवा भाव अपनाने की शिक्षा मिलती है। जलधारा निरंतर आगे बढ़ती है। बच्चों को भी अपने जीवन के मार्ग पर लगातार आगे बढ़ते रहना चाहिए और अपने लक्ष्य की ओर प्रयास करना चाहिए। धुआँ हमेशा ऊपर उठता है, जिससे यह संदेश मिलता है कि बच्चों को जीवन में ऊँचाई की ओर बढ़ते रहना चाहिए और कभी हार नहीं माननी चाहिए।

अंतिम पद में सत्पुरुष और गुरु का उदाहरण दिया गया है। सज्जन व्यक्तियों के जीवन से बच्चों को अपना चरित्र बनाने की प्रेरणा मिलती है। गुरु से अच्छी शिक्षा प्राप्त करना बच्चों को ज्ञानवान और सफल बनाता है। इसी तरह, कविता बच्चों को जीवन में सद्गुण अपनाने, दूसरों के प्रति प्रेम और सेवा भावना रखने तथा ज्ञान और नैतिकता के मार्ग पर चलने की शिक्षा देती है।

कविता का मुख्य संदेश यह है कि बच्चों को प्रकृति, वस्तुएँ और सज्जन व्यक्तियों से सीख लेकर जीवन में हमेशा खुश, विनम्र, ज्ञानप्रिय, मेहनती और स्नेही बनना चाहिए।

इसे भी पढ़ें: 

Leave a Comment