तिवारी का तोता प्रश्न उत्तर ॥ Tiwari Ka Tota Question Answer Class 6

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :
प्रश्न 1. तिवारी का तोता किस विधा की रचना है ?
(क) कविता
(ख) कहानी
(ग) नाटक
(घ) एकांकी
उत्तर :
(ख) कहानी।
प्रश्न 2. पण्डित तिवारी कहाँ रहते थे ?
(क) मथुरा
(ख) काशी
(ग) आगरा
(घ) दिल्ली
उत्तर :
(ख) काशी।
प्रश्न 3. तिवारी का तोता कहाँ रहता था ?
(क) जंगल में
(ख) पिंजरे में
(ग) मंगल पर
(घ) खेतों में
उत्तर :
(ख) पिंजरे में।
प्रश्न 4. तिवारी के पास कितने तोते थे ?
(क) एक
(ख) दो
(ग) तीन
(घ) चार
उत्तर :
(क) एक।
प्रश्न 5. पिंजरे के तोते के पास दूसरा तोता कहाँ से आया ?
(क) गाँव से
(ख) शहर से
(ग) जंगल से
(घ) पड़ोस से
उत्तर :
(ग) जंगल से।
लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर :
प्रश्न 1. पंडित तिवारी कहाँ रहते थे?
उत्तर : पंडित तिवारी काशी की पवित्र नगरी में रहते थे।
प्रश्न 2. एक दिन पिंजरे के सामने कौन आकर बैठ गया?
उत्तर : एक दिन पिंजरे के सामने जंगल का तोता आकर बैठ गया।
प्रश्न 3. पिंजरे का तोता पिंजरे की प्रशंसा क्यों करता है?
उत्तर : पिंजरे का तोता पिंजरे की प्रशंसा इसलिए करता है क्योंकि वह सोचता है कि पिंजरा उसे सुरक्षा, खाना-पानी और आराम देता है, और वह अपने मालिक की मेहरबानी से खुश है।
प्रश्न 4. पंडित तिवारी के बेटे ने पिंजरे में क्या डाला?
उत्तर : पंडित तिवारी के बेटे ने पिंजरे में लोहे की सींक डाली।
प्रश्न 5. मरे हुए तोते की मरी हुई आत्मा ने क्या कहा?
उत्तर : मरे हुए तोते की मरी हुई आत्मा ने कहा – “इस जंगली तोते को चूरी दो। इसने एक कैदी को छुडाया है और एक मुर्दे को जिंदा किया है।”
बोधमूलक प्रश्नोत्तर :
प्रश्न 1. पिंजरे के तोते से जंगल के तोते ने क्या कहा?
उत्तर : जंगल के तोते ने पिंजरे के तोते से कहा –
“तेरी आज़ादी का रंग मुर्दा हो चुका है, और तेरी आँखें अंधी हो गई हैं। तू अपने पिंजरे की तारीफ क्यों करता है? तू अभागा है क्योंकि तू कभी खुले आसमान तले पंख नहीं फैलाया और कभी अपनी मर्जी से जीवन नहीं जिया।”
प्रश्न 2. अभागा कहने पर जंगल के तोते से पिंजरे के तोते ने क्या पूछा?
उत्तर : पिंजरे के तोते ने पूछा –
“मुझे समझा, मैं क्यों अभागा हूँ और वह कौन-सा दुर्भाग्य है, जिसे मेरी आँख नहीं देखती?”
प्रश्न 3. पिंजरे के तोते ने अपने मालिक को मेहरबान और स्वयं को खुश किस्मत क्यों कहा?
उत्तर : पिंजरे के तोते ने अपने मालिक को मेहरबान और खुद को खुश किस्मत इसलिए कहा क्योंकि उसको खाना-पानी मिलता था, रात में सुरक्षा मिलती थी और पड़ोस की बिल्लियों से भी बचा रहता था।
प्रश्न 4. मालिक का कहना न मानने पर पिंजरे के तोते का क्या हाल हुआ?
उत्तर : मालिक का कहना न मानने पर पिंजरे के तोते को बार-बार सींक चुभाई गई, वह घायल हुआ और अंत में मर गया।
प्रश्न 5. मरे हुए तोते की आत्मा ने जंगल के तोते को चूरी देने की बात क्यों कही?
उत्तर : मरे हुए तोते की आत्मा ने जंगल के तोते को चूरी देने की बात इसलिए कही क्योंकि उसने पिंजरे के कैदी तोते को आज़ाद कर दिया और उसे असली आज़ादी का अनुभव कराया था।
प्रश्न 6. “तेरी आजादी का रंग मुर्दा हो गया है और तेरी आँखें अंधी हो गई।” आशय स्पष्ट़ कीजिए।
उत्तर : इसका आशय यह है कि पिंजरे में रहने वाले तोते ने अपनी आज़ादी खो दी है और वह अपने जीवन की असली खुशियाँ और स्वतंत्रता नहीं देख सकता। उसकी सोच और अनुभव बंद हो गए हैं, इसलिए उसका जीवन अधूरा और असंतुष्ट हो गया है।
प्रश्न 7. “तिवारी का तोता” शीर्षक कहानी का उद्देश्य क्या है?
उत्तर : इस कहानी का उद्देश्य यह है कि सुरक्षा और आराम के लिए किसी की आज़ादी का त्याग करना सही नहीं है। असली जीवन अपनी मर्जी से जीने, स्वतंत्र होने और खुले आसमान के अनुभव में है। कहानी हमें यह सिखाती है कि गुलामी और कैद में भले सुरक्षा हो, पर जीवन का असली आनंद और स्वतंत्रता खो जाता है।
तिवारी का तोता कहानी का सारांश
उत्तर :
कहानी “तिवारी का तोता” काशी की पवित्र नगरी में रहने वाले पंडित तिवारी और उनके पिंजरे में बंद तोते के इर्द-गिर्द घूमती है। पिंजरे का तोता आराम और सुरक्षा के साथ जीवन यापन करता है। उसे खाने-पीने की चिंता नहीं होती, उसे सुरक्षित स्थान मिलता है और पड़ोस की बिल्लियों या अन्य खतरे से बचाया जाता है। यही कारण है कि वह अपने मालिक की मेहरबानी से खुश रहता है और पिंजरे को अपना घर समझता है। उसे लगता है कि उसका जीवन सुरक्षित और सुखमय है।
एक दिन जंगल से एक आजाद तोता पिंजरे के पास आता है और पिंजरे वाले तोते से बातचीत करता है। जंगल का तोता उसे समझाने की कोशिश करता है कि असली जीवन खुले आसमान, खुली हवा और स्वतंत्रता में है। वह बताता है कि पिंजरे वाला तोता सिर्फ खाने और सुरक्षा के कारण खुश है, लेकिन वह वास्तव में कैदी है। उसकी आत्मा पिंजरे में कैद है, और उसने कभी अपनी मर्जी से उड़ान नहीं भरी, मौत का सामना नहीं किया और जीवन की असली खुशियाँ अनुभव नहीं की।
पिंजरे का तोता जंगल के तोते की बातों को पूरी तरह नहीं समझ पाता। वह सोचता है कि उसका मालिक मेहरबान है और यही उसकी खुशकिस्मती है। वह यह नहीं समझ पाता कि सुरक्षा और आराम के लिए स्वतंत्रता का त्याग करना उसे असली जीवन का आनंद लेने से रोक रहा है।
जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, पिंजरे का तोता इंसानों की भाषा बोलना बंद कर देता है और अपने मालिक की आज्ञा का पालन नहीं करता। पंडित तिवारी का बेटा उसे लोहे की सींक से मारता है, और तोता घायल होकर अंत में मर जाता है। जंगल का तोता कहता है कि जब गुलाम अपने मालिक की बात नहीं मानता तो यही हाल होता है, लेकिन मरे हुए तोते की आत्मा कहती है कि उसने कैदी को आज़ादी का अनुभव दिया और उसे असली जीवन का स्वाद चखाया।
प्रश्न 9. “तिवारी का तोता” कहानी में निहित संदेश लिखिए।
उत्तर :
कहानी “तिवारी का तोता” हमें जीवन के महत्वपूर्ण सत्य सिखाती है। यह कहानी बताती है कि स्वतंत्रता सबसे बड़ी पूंजी है। पिंजरे में रहने वाला तोता भले ही सुरक्षित था, उसे खाना-पानी और आराम मिलता था, लेकिन उसने अपने जीवन का असली आनंद कभी अनुभव नहीं किया। यह दिखाता है कि केवल सुरक्षा और सुविधा में जीवन अधूरा और कैद जैसा हो सकता है।
कहानी यह भी समझाती है कि अनुभव और जोखिम से ही जीवन सिखता है। जो व्यक्ति अपनी मर्जी से उड़ान नहीं भरता, चुनौतियों का सामना नहीं करता और नई चीज़ें नहीं सीखता, वह जीवन की असली खुशियाँ नहीं जान सकता। पिंजरे के तोते ने यही गलती की और उसे इसका परिणाम भुगतना पड़ा।
इसके साथ ही कहानी हमें यह सिखाती है कि गुलामी और आज़ादी का अंतर समझना जरूरी है। आराम और सुरक्षा के नाम पर अपने जीवन को दूसरों के हाथों में सौंपना सचमुच में एक प्रकार की गुलामी है। मरे हुए तोते की आत्मा बताती है कि जंगल का तोता उसे आज़ादी का अनुभव दिलाकर उसकी आत्मा को मुक्त कर गया।
इस प्रकार, कहानी का मुख्य संदेश यह है कि जीवन का असली सुख और आनंद स्वतंत्रता, अपनी मर्जी और अनुभव से जीने में है, न कि केवल सुरक्षा और आराम में।
विचार और कल्पना :
प्रश्न क) यदि पराधीनता होकर सैकड़ों प्रकार की सुविधाएँ भी मिल जाएँ तो भी प्राणों की आत्मा को सच्ची संतुष्टि नहीं मिल सकती।
उत्तर :
मेरी दृष्टि में यह विचार बिलकुल सही है। चाहे किसी के पास जीवन में कितनी भी सुविधाएँ हों—अच्छा खाना, सुरक्षित घर, आरामदायक जीवन—यदि वह पराधीन या कैदी है, तो उसे सच्ची संतुष्टि और खुशी कभी नहीं मिल सकती।
संतुष्टि केवल भौतिक सुखों से नहीं मिलती। जीवन का असली आनंद स्वतंत्रता, अपनी मर्जी से निर्णय लेने, अपनी इच्छाओं और क्षमताओं के अनुसार जीने में है। जब किसी का जीवन दूसरों के हाथों में होता है, तो उसकी आत्मा हमेशा अधूरी और असंतुष्ट रहती है।
जैसे “तिवारी का तोता” ने पिंजरे में रहते हुए खाना-पानी और सुरक्षा पाई, फिर भी वह अपने जीवन की असली खुशी और स्वतंत्रता अनुभव नहीं कर सका। यही बताता है कि सुविधाएँ और भौतिक सुख आत्मा की सच्ची संतुष्टि नहीं दे सकते।
इसलिए, जीवन में चाहे कितनी भी सुविधाएँ हों, स्वतंत्रता और आत्म-संतुष्टि सबसे बड़ी पूंजी है।
ख) पिंजरे के पक्षियों को मुक्त कराने के लिए उपाय सोचिए और बताइए कि क्या अपने मन बहलाव के लिए पक्षियों को कैद में रखना उचित हैं ।
उत्तर :
पिंजरे के पक्षियों को मुक्त कराने के लिए सबसे पहला उपाय यह है कि उन्हें पिंजरे से बाहर निकालकर खुले आसमान में उड़ान भरने का अवसर दिया जाए। इसके लिए उनके लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि वे आसानी से खाने-पीने और सुरक्षा का इंतजाम कर सकें। साथ ही, बच्चों और घरवालों को यह समझाना चाहिए कि पक्षियों की स्वतंत्रता उनके जीवन का अधिकार है।
मन बहलाव या मनोरंजन के लिए पक्षियों को कैद में रखना सही नहीं है। चाहे पिंजरे में उन्हें खाना-पानी और सुरक्षा मिले, यह उनके स्वाभाविक जीवन और स्वतंत्रता का हनन है। प्रत्येक जीव को अपनी मर्जी से जीने और उड़ान भरने का अधिकार है। यदि पक्षियों को कैद में रखा जाए, तो उनकी आत्मा असंतुष्ट रहती है और वे असली जीवन का आनंद नहीं ले पाते।
इसलिए, पक्षियों को खुली हवा में उड़ने दें और उनके प्राकृतिक जीवन का सम्मान करें। इससे न केवल पक्षियों की खुशी बढ़ेगी बल्कि हमें भी जीवन में स्वतंत्रता और सच्ची संतुष्टि का महत्व समझ में आएगा।
प्रश्न ग) हमारी स्वतंत्रता कायम रहे, इसके लिए हमें क्या सावधानी रखनी चाहिए सोचकर बताइए।
उत्तर :
हमारी स्वतंत्रता बनी रहे, इसके लिए हमें कई सावधानियाँ अपनानी चाहिए। सबसे पहले, हमें अपने अधिकारों और कर्तव्यों को समझना चाहिए। जब हम अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होंगे और उनका सम्मान करेंगे, तभी हमारी आज़ादी सुरक्षित रह सकती है।
दूसरा, हमें अन्य लोगों की स्वतंत्रता का भी सम्मान करना चाहिए। किसी की आज़ादी को दबाना या हनन करना हमारी और समाज की स्वतंत्रता के लिए खतरा है।
तीसरा, हमें सकारात्मक सोच और सही निर्णय लेने की आदत डालनी चाहिए। अपनी मर्जी से और सही सोच के अनुसार फैसले लेने वाले व्यक्ति की स्वतंत्रता हमेशा मजबूत रहती है।
चौथा, हमें अत्यधिक निर्भरता और पराधीनता से बचना चाहिए। दूसरों के हाथों में पूरी जिंदगी छोड़ देने से हमारी स्वतंत्रता खतरे में पड़ सकती है।
अतः हमारी स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए हमें जागरूक, जिम्मेदार, सही निर्णय लेने वाला और दूसरों के अधिकारों का सम्मान करने वाला नागरिक बनना चाहिए। यही सावधानी हमें असली आज़ादी और संतुष्टि देती है।
भाषा – बोध
प्रश्न क) ‘प्र’ उपसर्ग लगाकर लिखिए – बल, भाव, ताप, गति, तिज्ञा
उत्तर :
- बल → प्रबल
- भाव → प्रभाव
- ताप → प्रताप
- गति → प्रगति
- तिज्ञा → प्रतिज्ञा
प्रश्न ख) उपसर्ग अलग करके शब्द लिखिए – सुगंध, सुपुत्र, सुगम, सुअवसर, सूरत
उत्तर :
- सुगंध → सु + गंध
- सुपुत्र → सु + पुत्र
- सुगम → सु + गम
- सुअवसर → सु + अवसर
- सुरत → यह शब्द उपसर्ग नहीं है, इसलिए अलग नहीं किया जा सकता।
“तिवारी का तोता” कहानी के कठिन शब्दों का शब्दार्थ
- पवित्र – बहुत शुद्ध और पवित्र स्थान या चीज़
- पिंजरा – पंछियों को रखने वाला ढांचा
- जंगली – जंगल में रहने वाला, आज़ाद
- अभागा – दुर्भाग्यशाली, खुशकिस्मत नहीं
- दुर्भाग्य – बुरा भाग्य, मुश्किल
- आत्मा – जीव की जिंदगी या जीवन शक्ति
- बेगाना – अपना न होना, अजनबी
- मर्जी – अपनी इच्छा, मन की चाह
- मुसीबत – कठिनाई, परेशानी
- हैरान – चकित या आश्चर्यचकित
- जुबान – बोलने की शक्ति या भाषा
- गुलाम – जो किसी के अधीन हो, आज़ाद न हो
- छुबोना / सींक – चुभाना, चोट पहुंचाना
- आज़ाद – स्वतंत्र, बंधन से मुक्त
- संतुष्टि – मन की पूरी खुशी, संतोष
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