क्यों-क्यों लड़की पाठ के प्रश्न उत्तर क्लास 7 ॥ Kyu Kyu Ladki Question Answer Class 7

वस्तुनिष्ठ प्रश्न:
निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प चुनिए –
प्रश्न 1. मोइना किसका पीछा कर रही थी?
(क) बकरी का
(ख) लोमड़ी का
(ग) साँप का
(घ) बिल्ली का
उत्तर :
(ग) साँप का
प्रश्न 2. मोइना कैसी लड़की है?
(क) शांत
(ख) डरपोक
(ग) जिद्दी
(घ) बंचल
उत्तर :
(ग) जिद्दी
प्रश्न 3. मोइना के पिता काम की तलाश में किस शहर में गये हुए थे?
(क) पटना
(ख) जमशेदपुर
(ग) राँची
(घ) कोलकाता
उत्तर :
(ख) जमशेदपुर
प्रश्न 4. मोइना की उम्र कितनी थी?
(क) दस साल
(ख) बारह साल
(ग) आठ साल
(घ) पंद्रह साल
उत्तर :
(क) दस साल
लघूत्तरीय प्रश्न
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
प्रश्न 1. लेखिका ने किसे साँप का पीछा करते देखा?
उत्तर :
लेखिका ने मोइना को साँप का पीछा करते हुए देखा।
प्रश्न 2. खीरी कौन थी?
उत्तर :
खीरी मोइना की माँ थी।
प्रश्न 3. मोइना के भाई का क्या नाम था?
उत्तर :
मोइना के भाई का नाम गोरा था।
प्रश्न 4. मोइना क्या लेकर समिति वाली झोपड़ी में रहने के लिए गई?
उत्तर :
मोइना एक जोड़ी कपड़े और एक नेवले का बच्चा लेकर समिति वाली झोपड़ी में रहने के लिए गई।
प्रश्न 5. गाँव में प्राइमरी स्कूल खुलने पर सबसे पहले किसने दाखिला लिया?
उत्तर :
गाँव में प्राइमरी स्कूल खुलने पर सबसे पहले मोइना ने दाखिला लिया।
बोधमूलक प्रश्न:
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
प्रश्न 1. मोइना क्या-क्या काम करती थी?
उत्तर :
मोइना घर के कई काम करती थी। वह बकरियाँ चराती थी, जंगल से लकड़ी लाती थी और घर के लिए पानी भरकर लाती थी। वह चिड़िया पकड़ने के लिए फंदा भी लगाती थी। इसके अलावा वह बानू की गोशाला भी साफ करती थी।
प्रश्न 2. मोइना किस जाति की लड़की थी?
उत्तर :
मोइना शबर जाति की एक आदिवासी लड़की थी।
प्रश्न 3. मोइना को ‘क्यों-क्यों लड़की’ नाम किसने दिया था और क्यों?
उत्तर :
मोइना को ‘क्यों-क्यों लड़की’ नाम गाँव के पोस्टमास्टर ने दिया था, क्योंकि वह हर बात पर “क्यों-क्यों” पूछा करती थी।
प्रश्न 4. मोइना अन्य लड़कियों से किस प्रकार भिन्न थी?
उत्तर :
शबर जाति की दूसरी लड़कियों को ज्यादा काम नहीं करना पड़ता था, लेकिन मोइना को घर के कई काम करने पड़ते थे। इसलिए वह उनसे अलग थी।
प्रश्न 5. मोइना को पढ़ने की प्रेरणा कैसे मिली?
उत्तर :
लेखिका ने मोइना को बताया कि किताबों में उसके “क्यों-क्यों” के सभी सवालों के जवाब मिल सकते हैं। यह सुनकर मोइना को पढ़ने की प्रेरणा मिली। उसने निश्चय किया कि वह पढ़ना सीखेगी और अपने सभी सवालों के जवाब खुद ढूँढ़ेगी।
प्रश्न 6. आदिवासी लोगों की जीवन शैली का परिचय दीजिए।
उत्तर :
आदिवासी लोग गरीब और भूमिहीन होते हैं। उन्हें पानी लेने के लिए नदी तक दूर जाना पड़ता है। वे पत्तों की झोपड़ियों में रहते हैं और बकरियाँ पालते हैं। उनका भोजन साधारण होता है, जैसे हरे पत्ते, चावल, केकड़े और मिर्ची। वे इसे शाम को बड़े प्रेम और खुश होकर खाते हैं।
निर्देशानुसार उत्तर दीजिए :
क) ”इतनी जिद्दी है कि एक बात पकड़ ले तो उससे हटती ही नहीं ?”
प्रश्न 1. यह किसने किससे कहा?
उत्तर :
यह मोइना की माँ ने लेखिका से कहा।
प्रश्न 2. संकेतित पात्र की दो विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर :
संकेतित पात्र बहुत कृतज्ञ है और हमेशा कोई न कोई काम करती रहती है।
(ख) ‘आलस मत करो। सवाल पूछो।’
प्रश्न 1. यह किस पाठ की पंक्ति है? इसके लेखक का नाम लिखिए।
उत्तर :
यह पंक्ति ‘क्यों-क्यों लड़की’ पाठ से है। इसे लिखने वाली लेखिका महाश्वेता देवी हैं।
प्रश्न 2. इस पंक्ति की व्याख्या कीजिए।
उत्तर :
इस पंक्ति में मोइना कह रही है कि शिक्षिका को आलस्य नहीं करना चाहिए। उन्हें आलस्य छोड़कर अपने कर्तव्य में लगना चाहिए और पढ़ाई के विषय पर प्रश्न पूछने चाहिए।
भाषा बोध
1. निम्नलिखित शब्दों से प्रत्यय पृथक् कीजिए :
| शब्द | मूल शब्द (मूलधातु/नाम) | प्रत्यय |
|---|---|---|
| चोटियाँ | चोटी | इयाँ |
| हजारों | हजार | ओं |
| हिलाती | हिला | ती |
| बाबुओं | बाबू | ओं |
| बुदबुदाती | बुदबुदा | ती |
| मछलियाँ | मछली | इयाँ |
3. निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखिए :
- चिड़ियाँ – पक्षी, खग, पंछी, पंछीमंडली
- जंगल – वन, कांड, घना जंगल, उपवन
- सूरज – सूर्य, भानु, आदित्य, दिनकर
- साँप – सर्प, नाग, हरा, विषधर
- पृथ्वी – धरती, भुमि, भूमि, पृथ्वीमंडल
- पेड़ – वृक्ष, तरु, सत्वरु, गाछ
3. निम्नलिखित शब्दों का प्रयोग वाक्य में कीजिए :
- धुवतारा – रात को आकाश में धुवतारा चमक रहा था।
- कहानी – मोइना ने हमें मजेदार कहानी सुनाई।
- समिति – गाँव में खेल-कूद के लिए समिति बनाई गई।
- कक्षा – बच्चे अपनी कक्षा में पढ़ाई कर रहे थे।
- भूमिहीन – वह एक गरीब और भूमिहीन परिवार का बच्चा है।
कहानी का सारांश – “क्यों-क्यों लड़की” (Class 7 Hindi)
प्रस्तुत कहानी में लेखिका ने मोइना नाम की प्रमुख पात्र के माध्यम से आदिवासियों के जीवन पर प्रकाश डाला है। एक दिन लेखिका ने दस वर्ष की मोइना को साँप का पीछा करते देखा। मोइना के “क्यों” पूछने पर लेखिका ने बताया कि यह साधारण साँप नहीं, बल्कि नाग साँप है। लेखिका उसे उसकी माँ खीरी के पास ले गई और आराम करने के लिए कहा। मोइना ने बताया कि उसे बाबू की बकरियाँ घर लानी हैं, लकड़ी और पानी लाना है, चिड़ियाँ पकड़ने का फन्दा लगाना है और बहुत सारे काम करने हैं।
मोइना चावल खाने के बाद बाबू को धन्यवाद देने की बात पर कहती है कि वह तो गोशाला धोती है और इतने काम करती है, फिर धन्यवाद क्यों दूँ। उसकी माँ बताती है कि पोस्टमास्टर ने उसे ‘क्यों-क्यों लड़की’ नाम दिया है। मोइना शबर जाति की आदिवासी लड़की थी।
मोइना ने कहा कि उसे मीलों चलकर पानी लाना पड़ता है, झोपड़ियों में रहना पड़ता है और बकरियाँ चरानी पड़ती हैं, पर वह खुद को कमजोर नहीं मानती। उसका बचा-खुचा खाना खुद बनाकर परिवार के साथ बैठकर खाती थी। उसकी माँ खीरी एक पैर से पंगुली थी और पिता काम की तलाश में गए हुए थे। भाई गोरो लकड़ी लाने के लिए जंगल जाता था।
लेखिका अक्टूबर में समिति के साथ एक माह रुकी। मोइना एक जोड़ी कपड़े और नेवले का बच्चा लेकर समिति में पहुँची। समिति की शिक्षिका मालती बोनाल ने कहा कि मोइना के “क्यों-क्यों” से उन्हें परेशानी होगी। मोइना लगातार सवाल पूछती थी – बकरियाँ क्यों चरानी पड़ती हैं, मछलियाँ क्यों नहीं बोलती, सूरज से बड़े तारे छोटे क्यों दिखाई देते हैं और सोने से पहले किताब क्यों पढ़ती है। मोइना ने काम-काज निपटा कर कहा कि वह पढ़ना सीखकर सारे सवालों के जवाब ढूँढेगी। जो कुछ वह सीखती, बकरियाँ चराते समय दूसरे बच्चों को बताती थी।
मोइना ने मालती से स्कूल समय बदलने के लिए कहा ताकि गाय और बकरियाँ चराने वाले बच्चे भी पढ़ाई कर सकें। शाम को वह अपनी छोटी बहन और भाई को अच्छा व्यवहार और सीख बताती थी। अब मोइना अठारह साल की हो गई है और समिति के स्कूल में पढ़ती है। वह हठी और जिज्ञासु है और प्रश्न पूछने में कभी पीछे नहीं रहती। मोइना को पता नहीं कि लेखिका उसकी कहानी लिख रही है; अगर उसे पता चलता तो कहती – “क्यों मेरे बारे में क्यों?”
महाश्वेता देवी का जीवन परिचय
महाश्वेता देवी का जन्म 14 जनवरी 1926 को ढाका में हुआ था। उनके पिता मनीष घटक प्रसिद्ध कवि और साहित्यकार थे और माँ धरित्री देवी भी साहित्य में रुचि रखती थीं। बचपन में उन्हें पिता ‘तुतुल’ कहते थे, और वे भी उन्हें इसी नाम से पुकारती थीं। भारत के विभाजन के समय उनका परिवार पश्चिम बंगाल में बस गया।
प्रारंभिक शिक्षा और नटखट स्वभाव
महाश्वेता बचपन से ही नटखट और चंचल थीं। उन्होंने चार साल की उम्र में पढ़ना-लिखना सीख लिया था। परिवार के साथ अक्सर स्थान बदलने के कारण उन्हें ढाका, जलपाईगुड़ी, फरीदपुर आदि जगहों पर रहना पड़ा। बचपन में दुर्गा पूजा के समय नदी में डूबने से भी उन्हें बचाया गया।
शांतिनिकेतन में शिक्षा
10 साल की उम्र में महाश्वेता को शांतिनिकेतन भेजा गया। वहाँ उन्हें सुंदर भवन, लाइब्रेरी और अच्छी सहेलियाँ मिलीं। उन्होंने यहाँ बांग्ला और अंग्रेज़ी दोनों में शिक्षा प्राप्त की। गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर से भी पढ़ाई करने का मौका मिला।
कलकत्ता आगमन और स्कूली जीवन
1939 में महाश्वेता कलकत्ता आ गईं और बेलतला बालिका विद्यालय में आठवीं कक्षा में दाखिला लिया। यहाँ उनकी पहली रचना ‘रंगमशाल’ में छपी। स्कूल और घर में पढ़ाई का माहौल अच्छा था। उन्होंने 1942 में मैट्रिक परीक्षा पास की और ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ में भाग लिया।
व्यावसायिक शुरुआत और परिवारिक जिम्मेदारियाँ
किशोर अवस्था में ही उन्होंने परिवार की जिम्मेदारियाँ संभालनी शुरू कर दी। 1944 में महाश्वेता ने इंटरमीडिएट पूरा किया और बाद में शांतिनिकेतन से बी.ए. किया। 1947 में उनका विवाह विजन भट्टाचार्य से हुआ। उन्होंने घर चलाने के लिए पढ़ाई और लेखन दोनों से कमाई की।
‘झाँसी की रानी’ और लेखन जीवन
महाश्वेता ने अपनी पहली पुस्तक ‘झाँसी की रानी’ 1956 में प्रकाशित की। इसके बाद उन्होंने ‘नटी’, ‘जली थी अग्निशिखा’ जैसी कई रचनाएँ लिखीं। इन कहानियों और उपन्यासों में इतिहास और समाजिक समस्याओं का चित्रण होता है।
विवाह और व्यक्तिगत जीवन
1962 में उनके पहले विवाह का अंत हुआ और बाद में असीत गुप्त से दूसरा विवाह हुआ, जो 1975 में समाप्त हुआ। इसके बाद उन्होंने लेखन और आदिवासियों के काम में अपना ध्यान लगाया।
उपन्यास ‘अरण्येर अधिकार’
महाश्वेता का उपन्यास ‘अरण्येर अधिकार’ आदिवासियों के अधिकार और उनके संघर्ष की कहानी है। इसमें उन्होंने बिरसा मुंडा के जीवन और विद्रोह को बड़े ही सुंदर ढंग से लिखा। इस उपन्यास के लिए उन्हें 1979 में साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला।
प्रमुख रचनाएँ
- लघुकथाएँ: मीलू के लिए, मास्टर साब
- कहानियाँ: स्वाहा, रिपोर्टर, वान्टेड
- उपन्यास: नटी, अग्निगर्भ, झाँसी की रानी, 1084 की माँ, जली थी अग्निशिखा, जकड़न
- आत्मकथा: उम्रकैद, अक्लांत कौरव
- आलेख: ग्राम बांग्ला, जंगल के दावेदार, आदिवासी कथा
- यात्रा संस्मरण: श्री श्री गणेश महिमा, ईंट के ऊपर ईंट
- नाटक: टेरोडैक्टिल, दौलति
महाश्वेता देवी ने अपने लेखन के माध्यम से समाज में न्याय, समानता और आदिवासियों के अधिकारों की आवाज़ उठाई।
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