अपूर्व अनुभव प्रश्न उत्तर Class 6 ॥ Apurv Anubhav Class 6 Question Answer

अपूर्व अनुभव प्रश्न उत्तर class 6 ॥ Apurv Anubhav Class 6 Question Answer ॥ अपूर्व अनुभव का सारांश

अपूर्व अनुभव प्रश्न उत्तर class 6 ॥ Apurv Anubhav Class 6 Question Answer ॥ अपूर्व अनुभव का सारांश

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1. तोत्तो-चान कहाँ की रहने वाली थी ?
(क) तोमोए
(ख) कूहोन्बुत्सु
(ग) डेनेन चोफु
(घ) इनमें से कोई नहीं ।
उत्तर :
(क) तोमोए

प्रश्न 2. बच्चे अपने-अपने पेड़ को मानते थे –
(क) निजी संपत्ति
(ख) परायी संपत्ति
(ग) तोत्तो-चान की सम्पत्ति
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर :
(क) निजी संपत्ति

प्रश्न 3. तोत्तो-चान एवं यासुकी-चान में क्या थी।
(क) मित्रता
(ख) शत्रुता
(ग) भाईचारा
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर :
(क) मित्रता

प्रश्न 4. तोत्तो-चान किसे अपने पेड़ पर चढ़ाने वाली थी ?
(क) यासुकी-चान को
(ख) तेत्सुको कुरियानागी को
(ग) सुमोयान को
(घ) इनमें से कोई नहीं ।
उत्तर :
(क) यासुकी-चान

प्रश्न 5. यासुकी-चान को कौन-सा रोग था ?
(क) लकवा
(ख) पोलियो
(ग) मिरगी
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर :
(ख) पोलियो

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1. तोत्तो-चान के लिए एक बड़ा साहस करने का दिन कब आया?
उत्तर: तोत्तो-चान के लिए बड़ा साहस करने का दिन सभागार में शिविर लगने के दो दिन बाद आया।

प्रश्न 2. यासुकी-चान कौन था?
उत्तर: यासुकी-चान तोत्तो-चान का मित्र था, जो पोलियो से पीड़ित था और इसलिए ठीक से चल-फिर या पेड़ पर चढ़ नहीं पाता था।

प्रश्न 3. तोत्तो-चान का पेड़ कहाँ था?
उत्तर: तोत्तो-चान का पेड़ मैदान के बाहरी हिस्से में, कुहोन्कुत्सु जाने वाली सड़क के पास था।

प्रश्न 4. द्विशाखा क्या है?
उत्तर: द्विशाखा पेड़ का वह स्थान होता है जहाँ तना दो शाखाओं में बँट जाता है, जो बैठने के लिए आरामदायक जगह बन जाती है।

प्रश्न 5. यासुकी-चान के हाथ-पैर कैसे थे?
उत्तर: यासुकी-चान के हाथ-पैर कमजोर थे, इसलिए वह ठीक से चल-फिर या सीढ़ी पर चढ़ नहीं पाता था।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1. तोत्तो-चान यासुकी-चान को अपने पेड़ पर क्यों चढ़ने देना चाहती थी?
उत्तर: तोत्तो-चान यासुकी-चान को अपने पेड़ पर इसलिए चढ़ने देना चाहती थी ताकि वह भी पेड़ पर चढ़ने का आनंद ले सके और एक नया अनुभव प्राप्त कर सके, क्योंकि वह पोलियो के कारण ऐसा कभी नहीं कर पाया था।

प्रश्न 2. तोत्तो-चान माँ से क्या कहकर घर से निकली?
उत्तर: तोत्तो-चान माँ से यह कहकर घर से निकली कि वह यासुकी-चान के घर जेनबोफु जा रही है

प्रश्न 3. ‘अपूर्व अनुभव’ कहानी से क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर: इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि सच्ची मित्रता में प्रेम, सहानुभूति और मदद करने की भावना होनी चाहिए। हमें दूसरों की कमजोरियों को समझकर उनकी मदद करनी चाहिए और उन्हें खुश करने का प्रयास करना चाहिए।

प्रश्न 4. “सूरज का ताप उन पर चढ़ रहा था, पर दोनों का ध्यान यासुकी-चान के ऊपर तक पहुँचने में रमा था।” ससन्दर्भ व्याख्या कीजिए।

उत्तर:
यह कथन ‘अपूर्व अनुभव’ कहानी से लिया गया है। इस प्रसंग में तोत्तो-चान अपने मित्र यासुकी-चान को पेड़ पर चढ़ाने की पूरी कोशिश कर रही थी। उस समय तेज धूप पड़ रही थी और गर्मी भी बहुत थी, लेकिन दोनों को उसकी परवाह नहीं थी।

उनका पूरा ध्यान केवल इस बात पर था कि यासुकी-चान किसी तरह पेड़ की ऊँचाई तक पहुँच जाए। यह वाक्य उनके दृढ़ निश्चय, साहस और सच्ची मित्रता को दर्शाता है, जहाँ वे कठिनाई और असुविधा को भूलकर अपने लक्ष्य में लगे हुए थे।

प्रश्न: 5  अपूर्व अनुभव का सारांश लिखिए।

उत्तर:
‘अपूर्व अनुभव’ कहानी में तोत्तो-चान और यासुकी-चान की गहरी मित्रता, साहस, संवेदनशीलता और दृढ़ निश्चय का मार्मिक चित्रण किया गया है। यासुकी-चान पोलियो से पीड़ित था, जिसके कारण उसके हाथ-पैर कमजोर थे और वह अन्य बच्चों की तरह पेड़ पर चढ़ने में असमर्थ था। तोत्तो-चान अपने मित्र को भी पेड़ पर चढ़ने का आनंद दिलाना चाहती थी, इसलिए उसने एक साहसिक निर्णय लिया।

उसने बिना किसी को बताए यासुकी-चान को अपने पेड़ पर चढ़ने के लिए आमंत्रित किया। उसने अपनी माँ से झूठ बोलकर घर से निकलते समय कहा कि वह यासुकी-चान के घर जा रही है। स्कूल पहुँचकर दोनों ने मिलकर इस योजना को पूरा करने का निश्चय किया।

तोत्तो-चान पहले एक सीढ़ी लाकर पेड़ के सहारे लगाती है, लेकिन यासुकी-चान अपने कमजोर हाथ-पैरों के कारण उस पर चढ़ नहीं पाता। यह देखकर तोत्तो-चान निराश होती है, पर हार नहीं मानती। फिर वह एक तिपाई-सीढ़ी लाती है और पूरी लगन से उसकी मदद करती है। वह नीचे खड़े होकर उसे सहारा देती है, उसके पैरों को सीढ़ी पर जमाती है और अपने सिर से भी उसे संतुलित करने की कोशिश करती है।

तेज धूप और कठिन परिस्थितियों के बावजूद दोनों का ध्यान केवल इस बात पर रहता है कि यासुकी-चान किसी तरह ऊपर पहुँच जाए। अंततः कड़ी मेहनत और साहस के बाद यासुकी-चान पेड़ की द्विशाखा तक पहुँच जाता है।

पेड़ पर पहुँचकर यासुकी-चान को एक नया और अनोखा अनुभव मिलता है, जिसे उसने पहले कभी महसूस नहीं किया था। वह बहुत खुश होता है और दोनों पेड़ पर बैठकर बातें करते हैं। इस प्रकार, यह अनुभव यासुकी-चान के जीवन का एक विशेष और यादगार क्षण बन जाता है।

यह कहानी हमें सिखाती है कि सच्ची मित्रता में सहानुभूति, प्रेम और सहयोग का भाव होना चाहिए। हमें दूसरों की कठिनाइयों को समझकर उनकी मदद करनी चाहिए और उन्हें खुशी देने का प्रयास करना चाहिए।

भाषा बोध :

प्रश्न: 1.  वाक्य में प्रयोग कीजिए – शिविर, न्योता, छुट्टी, संपत्ति, उल्लास

उत्तर:

  1. शिविर – विद्यालय में गर्मी की छुट्टियों में एक प्रशिक्षण शिविर लगाया गया।
  2. न्योता – उसने अपने मित्र को जन्मदिन की पार्टी में आने का न्योता दिया।
  3. छुट्टी – आज स्कूल में अचानक छुट्टी हो गई।
  4. संपत्ति – हमें दूसरों की संपत्ति का सम्मान करना चाहिए।
  5. उल्लास – त्योहार के दिन बच्चों के चेहरे पर बहुत उल्लास दिखाई देता है।

प्रश्न: 2.  निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिए – ऊपर, आकाश, झूठ, पीछे, गरमी

उत्तर:

  1. ऊपर – नीचे
  2. आकाश – धरती
  3. झूठ – सच
  4. पीछे – आगे
  5. गरमी – सर्दी

प्रश्न: इस पाठ में आए कठिन शब्दों के शब्दार्थ

  1. शिविर – अस्थायी निवास या प्रशिक्षण का स्थान
  2. न्योता – निमंत्रण, बुलावा
  3. द्विशाखा – पेड़ का वह भाग जहाँ तना दो शाखाओं में बँट जाता है
  4. उल्लास – खुशी, आनंद
  5. संपत्ति – अपना अधिकार या वस्तु, निजी चीज
  6. उत्तेजित – बहुत उत्साहित या जोश में होना
  7. हताशा – निराशा, आशा टूट जाना
  8. निश्चय – दृढ़ निर्णय
  9. साहस – हिम्मत, बहादुरी
  10. झिझक – संकोच, हिचकिचाहट
  11. तिपाई – तीन पैरों वाली वस्तु (जैसे तीन पैरों वाली सीढ़ी)
  12. सहारा – मदद, आधार
  13. जोखिम – खतरा
  14. संवेदनशीलता – दूसरों की भावनाओं को समझने की क्षमता
  15. अनुभव – किसी काम को करके प्राप्त ज्ञान या एहसास

16. भेद – रहस्य, गुप्त बात
17. न्योता देना – बुलाना, आमंत्रित करना
18. फिसलना – पैर का संतुलन बिगड़ना
19. आरामदेह – आराम देने वाला, सुखद
20. निजी – व्यक्तिगत, अपना
21. शिष्टता – विनम्रता, सभ्यता
22. आमंत्रित – बुलाया गया
23. घसीटना – खींचते हुए ले जाना
24. सहारे – आधार देकर, मदद से
25. धकियाना – धक्का देना
26. नाजुक – कोमल, कमजोर
27. इच्छा – चाह, मन की भावना
28. चेहरा लटकाना – उदास होना
29. तरबतर – पूरी तरह भीगा हुआ (पसीने से)
30. निश्चयपूर्वक – पक्का निर्णय लेकर
31. जूझना – संघर्ष करना
32. छलाँग लगाना – उछलकर कूदना
33. रुलाई – रोने की स्थिति
34. भरोसा – विश्वास
35. खींचना – अपनी ओर बल लगाकर लाना
36. छाया – परछाईं, धूप से बचाव की जगह
37. झुकना – नीचे की ओर मुड़ना
38. झिझकना – संकोच करना
39. उमंग – उत्साह, खुशी
40. लुभावनी – आकर्षक, मन को भाने वाली

 

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