भगवान के डाकिए कविता की व्याख्या ॥ Bhagwan Ke Dakiye Kavita Ki Vyakhya ॥ भगवान के डाकिए कविता की व्याख्या क्लास 6

पद – 1
“ये भगवान के डाकिए हैं,
जो एक महादेश से
दूसरे महादेश को जाते हैं।
हम तो समझ नहीं पाते हैं,
मगर उनकी लाई चिट्ठियाँ
पेड़, पौधे, पानी और पहाड़
बाँचते हैं।”
शब्दार्थ :
डाकिए – पत्र पहुँचाने वाले, महादेश – बहुत बड़ा भूभाग या महाद्वीप, समझ – जानना या अर्थ ग्रहण करना, लाई – लाकर दी हुई, चिट्ठियाँ – पत्र या संदेश, बाँचते – पढ़ते हैं।
संदर्भ :
प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘साहित्य मेला’ के पाठ ‘भगवान के डाकिए’ से ली गई हैं। इसके कवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ हैं। इस कविता में कवि ने पक्षियों और बादलों को भगवान का डाकिया बताया है, क्योंकि वे एक स्थान से दूसरे स्थान तक घूमते रहते हैं।
व्याख्या :
कवि कहते हैं कि पक्षी और बादल भगवान के डाकिए की तरह काम करते हैं। जैसे डाकिया एक जगह से दूसरी जगह चिट्ठी पहुँचाता है, वैसे ही पक्षी और बादल एक महादेश से दूसरे महादेश तक जाते रहते हैं। वे दुनिया के अलग-अलग स्थानों की खबरें अपने साथ लेकर चलते हैं।
कवि आगे कहते हैं कि हम मनुष्य इनकी लाई हुई चिट्ठियों को समझ नहीं पाते। लेकिन प्रकृति के तत्व जैसे पेड़-पौधे, पानी और पहाड़ इन संदेशों को समझ लेते हैं। जब बादल आते हैं तो बारिश होती है, जिससे पेड़-पौधे और नदियाँ खुश हो जाती हैं।
इस प्रकार कवि हमें बताना चाहते हैं कि प्रकृति के सभी तत्व आपस में जुड़े हुए हैं और वे एक-दूसरे के संदेश को समझते हैं।
पद – 2
“हम तो केवल यह आँकते हैं
कि एक देश की धरती
दूसरे देश को सुगंध भेजती है।
और वह सौरभ हवा में तैरते हुए
पक्षियों की पाँखों पर तिरता है।
और एक देश का भाप
दूसरे देश में पानी
बनकर गिरता है।”
शब्दार्थ :
आँकते – अनुमान लगाते हैं, धरती – जमीन या भूमि, सुगंध – खुशबू, सौरभ – सुगंध या महक, तैरते – हवा में इधर-उधर चलते हुए, पाँखों – पंख, तिरता – उड़ते या बहते हुए जाना, भाप – पानी से बनने वाली वाष्प, गिरता – नीचे आना या बरसना।
संदर्भ :
प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘साहित्य मेला’ के पाठ ‘भगवान के डाकिए’ से ली गई हैं। इसके कवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ हैं। इस कविता में कवि ने पक्षियों और बादलों को भगवान का डाकिया बताया है, क्योंकि वे एक स्थान से दूसरे स्थान तक संदेश पहुँचाते हैं।
व्याख्या :
कवि कहते हैं कि हम मनुष्य केवल इतना ही अनुमान लगा सकते हैं कि एक देश की धरती अपनी सुगंध दूसरे देश तक भेजती है। यह सुगंध हवा में फैल जाती है और ऐसा लगता है कि वह पक्षियों के पंखों पर बैठकर एक जगह से दूसरी जगह जा रही है।
कवि आगे बताते हैं कि एक देश से उठी हुई पानी की भाप बादलों के रूप में दूसरे देश तक पहुँच जाती है। फिर वही भाप वहाँ जाकर पानी बनकर बारिश के रूप में गिरती है। इस प्रकार पक्षी और बादल प्रकृति के संदेशवाहक बनकर एक देश को दूसरे देश से जोड़ते हैं।
भगवान के डाकिए कविता का सारांश
‘भगवान के डाकिए’ कविता में कवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ ने प्रकृति की अद्भुत व्यवस्था और उसके आपसी संबंध को बहुत सुंदर और सरल भाषा में समझाया है। इस कविता में कवि ने पक्षियों और बादलों को भगवान का डाकिया कहा है। जैसे डाकिया एक स्थान से दूसरे स्थान तक चिट्ठियाँ पहुँचाता है, वैसे ही पक्षी और बादल एक देश से दूसरे देश और एक महादेश से दूसरे महादेश तक जाते रहते हैं और प्रकृति के संदेश फैलाते हैं।
कवि बताते हैं कि जब पक्षी और बादल एक जगह से दूसरी जगह जाते हैं, तो वे अपने साथ अनेक प्रकार के संदेश भी ले जाते हैं। हम मनुष्य उन संदेशों को ठीक से समझ नहीं पाते, लेकिन प्रकृति के अन्य तत्व जैसे पेड़-पौधे, नदियाँ, पहाड़ और धरती उन्हें समझ लेते हैं। जब बादल आते हैं तो वर्षा होती है, जिससे पेड़-पौधे हरे-भरे हो जाते हैं और नदियों में पानी बढ़ जाता है। इस प्रकार प्रकृति के सभी तत्व एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और एक-दूसरे की सहायता करते हैं।
कवि यह भी बताते हैं कि एक देश की धरती की सुगंध हवा के माध्यम से दूसरे देश तक पहुँचती है। यह सुगंध हवा में फैलती हुई ऐसी प्रतीत होती है जैसे वह पक्षियों के पंखों पर बैठकर दूर-दूर तक जा रही हो। इसी प्रकार एक स्थान से उठने वाली जल की भाप बादलों के रूप में आकाश में उड़ती है और फिर किसी दूसरे देश में जाकर वर्षा के रूप में गिरती है। इस तरह बादल एक स्थान का पानी दूसरे स्थान तक पहुँचा देते हैं।
इस कविता के माध्यम से कवि हमें यह समझाना चाहते हैं कि पूरी प्रकृति एक परिवार की तरह है और उसके सभी भाग आपस में जुड़े हुए हैं। पक्षी और बादल भगवान के डाकिए की तरह काम करते हैं और पूरी धरती पर प्रकृति के संदेश फैलाते हैं। इस प्रकार यह कविता हमें प्रकृति के महत्व और उसके सुंदर संबंधों को समझने की प्रेरणा देती है।
रामधारी सिंह दिनकर का जीवन परिचय
रामधारी सिंह ‘दिनकर’ हिंदी साहित्य के महान कवि, लेखक और निबंधकार थे। उनका जन्म 23 सितंबर 1908 को बिहार के सिमरिया गाँव (जिला बेगूसराय) में हुआ था। उनके पिता का नाम रवि सिंह और माता का नाम मनरूप देवी था। दिनकर जी बचपन से ही बहुत प्रतिभाशाली थे। उन्होंने अपनी मेहनत और प्रतिभा के बल पर हिंदी साहित्य में एक महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त किया।
दिनकर जी को हिंदी साहित्य में ‘राष्ट्रकवि’ के नाम से जाना जाता है। उनकी कविताओं में देशभक्ति, वीरता, जोश और राष्ट्रीय चेतना की भावना दिखाई देती है। वे छायावादोत्तर काल के प्रमुख कवि थे। उनकी रचनाओं में एक ओर वीर रस और ओजपूर्ण भाषा मिलती है, तो दूसरी ओर कोमल और भावनात्मक विचार भी देखने को मिलते हैं।
उनकी प्रमुख काव्य रचनाओं में रेणुका, हुंकार, कुरुक्षेत्र, रश्मिरथी, उर्वशी और सामधेनी आदि शामिल हैं। इसके अलावा उन्होंने कई महत्वपूर्ण गद्य रचनाएँ भी लिखीं, जैसे संस्कृति के चार अध्याय, मिट्टी की ओर, रेती के फूल और शुद्ध कविता की खोज। उनकी रचनाएँ आज भी लोगों को देशप्रेम, साहस और उच्च आदर्शों के लिए प्रेरित करती हैं।
दिनकर जी को उनके उत्कृष्ट साहित्यिक कार्यों के लिए कई बड़े सम्मान मिले। उन्हें 1959 में पद्म भूषण, ‘संस्कृति के चार अध्याय’ के लिए साहित्य अकादेमी पुरस्कार और ‘उर्वशी’ के लिए ज्ञानपीठ पुरस्कार दिया गया। वे तीन बार राज्यसभा के सदस्य भी रहे और उन्होंने साहित्य के साथ-साथ देश की सेवा भी की। 24 अप्रैल 1974 को उनका निधन हो गया, लेकिन उनकी रचनाएँ आज भी लोगों को प्रेरणा देती हैं।
इसे भी पढ़ें :
- वह चिड़िया जो कविता की व्याख्या ॥ Vah Chidiya Jo Kavita Vyakhya Class 6
- इनसे सीखो कविता का व्याख्या क्लास 6 ॥ इनसे सीखो कविता का भावार्थ ॥ Inse Sikho Kavita Ka Vyakhya
- वृंद के दोहे की व्याख्या क्लास 6॥ वृंद के दोहे का व्याख्या क्लास 6 ॥ Vrind Ke Dohe Ki Vyakhya Class 6
- इनसे सीखो कविता Question Answer Class 6 ॥ Inse Sikho Kavita Ka Question Answer
- वृन्द के दोहे Class 6 Question Answer ॥ Vrind Ke Dohe Class 6 Question Answer
- वह चिड़िया जो कविता कक्षा 6 प्रश्न उत्तर ॥ Vah Chidiya Jo Class 6 Question Answer