भगवान के डाकिए प्रश्न उत्तर ॥ भगवान के डाकिए question answer class 6 ॥ Bhagwan Ke Dakiye Question Answer

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :
प्रश्न 1.पक्षी और बादल किसके डाकिए हैं ?
(क) मनुष्य के
(ख) भगवान के
(ग) धरती के
(घ) पक्षियों के
उत्तर :
(ख) भगवान के।
प्रश्न 2.एक देश की धरती दूसरे देश को क्या भेजती है?
(क) धन
(ख) अन्न
(ग) सुगंध
(घ) स्नेह
उत्तर :
(ग) सुगंध।
प्रश्न 3.भगवान के डाकिए की चिट्ठी कौन बाँचता है ?
(क) पेड़
(ख) पौधे
(ग) पानी और पहाड़
(घ) ये सभी
उत्तर :
(घ) ये सभी।
लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर :
प्रश्न 1.भगवान के डाकिए कौन हैं ?
उत्तर :
पक्षी और बादल भगवान के डाकिए हैं।
प्रश्न 2.भगवान के डाकिए कहाँ जाते हैं ?
उत्तर :
भगवान के डाकिए एक महादेश से दूसरे महादेश तक जाते हैं।
प्रश्न 3. एक देश की धरती दूसरे देश को क्या भेजती है ?
उत्तर :
एक देश की धरती दूसरे देश को सुगंध भेजती है।
प्रश्न 4. सौरभ कहाँ तैरता है?
उत्तर :
सौरभ हवा में और पक्षियों के पंखों पर तैरता है।
प्रश्न 5.एक देश का भाप दूसरे देश में क्या बनकर गिरता है ?
उत्तर :
एक देश का भाप दूसरे देश में पानी बनकर गिरता है।
बोधमूलक प्रश्नोत्तर :
प्रश्न 1. कवि ने पक्षी और बादल को भगवान के डाकिए क्यों बताया है ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
कवि ने पक्षी और बादल को भगवान के डाकिए इसलिए बताया है क्योंकि वे हमेशा एक देश से दूसरे देश तक जाते रहते हैं। वे प्रकृति के संदेश एक जगह से दूसरी जगह पहुँचाते हैं, जैसे डाकिया चिट्ठियाँ पहुँचाता है। इसलिए कवि ने उन्हें भगवान का डाकिया कहा है।
प्रश्न 2. प्रस्तुत कविता का मूल भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
इस कविता में कवि ने पक्षी और बादल के महत्त्व को बताया है। ये दोनों एक देश से दूसरे देश तक प्रकृति के संदेश पहुँचाते हैं। इनके माध्यम से एक देश की धरती अपनी सुगंध दूसरे देश तक भेजती है और बादल एक देश की भाप को दूसरे देश में ले जाकर वर्षा के रूप में बरसाते हैं। इस प्रकार कवि यह बताना चाहते हैं कि पूरी दुनिया प्रकृति के माध्यम से आपस में जुड़ी हुई है।
निर्देशानुसार उत्तर दीजिए –
प्रश्न 1. हम तो केवल यह आँकते हैं कि एक देश की धरती दूसरे देश को सुगंध भेजती है।
(i) पाठ और कवि का नाम बताइए।
उत्तर :
प्रस्तुत पंक्तियाँ ‘भगवान के डाकिए’ पाठ से ली गई हैं। इसके कवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ हैं।
(ii) उपर्युक्त अंश का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
इस अंश में कवि यह बताना चाहते हैं कि पक्षी और बादल के माध्यम से एक देश की धरती अपनी सुगंध दूसरे देश तक पहुँचा देती है। प्रकृति के ये तत्व एक स्थान से दूसरे स्थान तक संदेश ले जाते हैं और दुनिया को आपस में जोड़ते हैं।
भाषा बोध –
क) ‘महादेश’ शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है – महा + देश। इसी प्रकार ‘महा’ उपसर्ग के साथ कुछ और शब्दों को जोड़कर नये शब्द बनाइये ।
‘महा’ उपसर्ग से बने कुछ शब्द :
- महा + पुरुष = महापुरुष
- महा + शक्ति = महाशक्ति
- महा + युद्ध = महायुद्ध
- महा + राजा = महाराजा
- महा + बल = महाबल
- महा + ज्ञानी = महाज्ञानी
- महा + उत्सव = महाउत्सव
- महा + समुद्र = महासमुद्र
इस प्रकार ‘महा’ उपसर्ग जुड़ने से शब्द का अर्थ और अधिक बड़ा, महान या विशेष हो जाता है।
ख) निम्नलिखित शब्दों का लिंग बताइये – चिट्ठी, पहाड़, पेड़, सुगंध, पक्षी
- चिट्ठी – स्त्रीलिंग
- पहाड़ – पुल्लिंग
- पेड़ – पुल्लिंग
- सुगंध – स्त्रीलिंग
- पक्षी – पुल्लिंग
ग) निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखिए –
- पहाड़ – पर्वत, गिरि, शैल
- सौरभ – सुगंध, खुशबू, महक
- पंख – पर, परा, पंखुड़ी
- पानी – जल, नीर, तोय
- धरती – पृथ्वी, भूमि, धरा
दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर :
प्रश्न 1. कवि ने पक्षी और बादल को भगवान के डाकिए के रूप में किस प्रकार स्पष्ट किया है? पक्षी और बादल डाकिए की भूमिका किस प्रकार निभाते हैं?
उत्तर :
प्रस्तुत कविता में कवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ ने पक्षी और बादल को भगवान के डाकिए के रूप में चित्रित किया है। जैसे डाकिया एक स्थान से दूसरे स्थान तक लोगों की चिट्ठियाँ पहुँचाता है, उसी प्रकार पक्षी और बादल भी प्रकृति के संदेश एक देश से दूसरे देश तक ले जाते हैं। पक्षी दूर-दूर तक उड़कर विभिन्न देशों और महाद्वीपों में पहुँचते हैं और बादल भी आकाश में घूमते हुए एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाते रहते हैं।
मनुष्य भले ही इन संदेशों को न समझ पाए, लेकिन पेड़-पौधे, नदियाँ और पर्वत इन्हें समझ लेते हैं। जब बादल भाप से भरी हवाओं को लेकर किसी स्थान पर पहुँचते हैं, तो वहाँ वर्षा होती है। वर्षा से पेड़-पौधे हरे-भरे हो जाते हैं और सूखी धरती तथा पर्वत भी जल पाकर तृप्त हो जाते हैं।
कवि के अनुसार हम यह अनुमान लगाते हैं कि एक देश की धरती और फूलों की सुगंध दूसरे देश तक पहुँच जाती है। पक्षी हवा के सहारे उड़ते हुए इस सुगंध को दूर-दूर तक फैलाते हैं। इसी प्रकार एक देश की भाप बादल बनकर दूसरे देश में जाकर पानी के रूप में बरसती है। इस तरह पक्षी और बादल प्रकृति के संदेशवाहक बनकर संसार के अलग-अलग देशों को जोड़ते हैं, इसलिए कवि ने उन्हें भगवान के सच्चे डाकिए कहा है।
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