धानों का गीत कविता का प्रश्न उत्तर क्लास 6 ॥ Dhano Ka Geet Question Answer Class 6

धानों का गीत कविता का प्रश्न उत्तर क्लास 6 ॥ Dhano Ka Geet Question Answer Class 6

धानों का गीत कविता का प्रश्न उत्तर क्लास 6 ॥ Dhano Ka Geet Question Answer Class 6

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1. खेत में धान उगने को कवि किस रूप में देखता है ?
(क) प्रान उगेंगे
(ख) ज्ञान उगेंगे
(ग) जान उगेंगे
(घ) इनमें से कोई नहीं

उत्तर :
(क) प्रान उगेंगे।

प्रश्न 2. कवि किसको आने के लिए कहता है ?
(क) चन्दा को
(ख) सूरज को
(ग) बादल को
(घ) हवा को

उत्तर :
(ग) बादल को।

प्रश्न 3. आगे कौन पुकारेगा ?
(क) अँखड़ियाँ
(ख) डगरिया
(ग) गुजरिया
(घ) कलगियाँ

उत्तर :
(ख) डगरिया।

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1. कवि चंदा को किसमें बाँधने की बात कहता है ?
उत्तर :
कवि कहता है कि चाँद को धान की कच्ची बालियों में बाँध देना चाहिए।

प्रश्न 2. गीली अँखड़ियाँ किसे पुकारेगी ?
उत्तर :
गीली अँखड़ियाँ संझा (शाम) को पुकारेंगी।

प्रश्न 15. धानों का गीत किस प्रकार की कविता है ?
उत्तर :
धानों का गीत ग्रामीण जीवन और गाँव के वातावरण का वर्णन करने वाली ग्राम्य कविता है।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1. प्रस्तुत कविता में बादल का स्वागत किनके द्वारा किया गया है ?
उत्तर :
इस कविता में बादल का स्वागत किसान करते हैं। जब बादल आते हैं तो किसान खुश हो जाते हैं। खेत, पेड़-पौधे और पूरी प्रकृति भी बादल के आने से खुश होकर उसका स्वागत करती है।

प्रश्न 2. कवि ‘आनाजी बादल जरूर’ कहकर बादलों का आह्वान क्यों करता है?
उत्तर :
कवि बादलों को इसलिए बुलाता है क्योंकि वर्षा से खेतों में फसल अच्छी होती है। बारिश होने पर पेड़-पौधे हरे-भरे हो जाते हैं और नदियाँ-तालाब पानी से भर जाते हैं। इससे किसान और पूरी प्रकृति खुश हो जाती है। इसलिए कवि बादलों को आने के लिए पुकारता है।

प्रश्न 3. बादल का स्वागत कौन-कौन और कब-कब करते हैं ?
उत्तर :
बादल का स्वागत किसान, खेत-खलिहान, पेड़-पौधे और फसलें करते हैं। जब गर्मी के कारण धरती सूख जाती है और फसलें पानी के बिना मुरझाने लगती हैं, तब आषाढ़ के महीने में बादलों के आने पर सब लोग उनका खुशी से स्वागत करते हैं।

प्रश्न 4. ‘धान पकेंगे कि प्रान पकेंगे’ इस पंक्ति में धान को प्राण क्यों कहा गया है?
उत्तर :
धान को प्राण इसलिए कहा गया है क्योंकि धान से ही अन्न मिलता है और अन्न से ही लोगों का जीवन चलता है। अगर धान की फसल अच्छी होती है तो लोगों को खाने के लिए अन्न मिल जाता है। इसलिए धान को लोगों के जीवन यानी प्राण के समान माना गया है।

निर्देशानुसार उत्तर दीजिए :

(क) धूप ढरे तुलसी वन झेरेंगे ……….. धान दिये की बेर।

(i) साँझ घिरने पर कौन झरता है?

उत्तर : साँझ होने पर तुलसी-वन, कनेर और ज्वार झरने लगते हैं।

ख) ऊपर की पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए। 

उत्तर: इन पंक्तियों में कवि गाँव के शाम के सुंदर दृश्य का वर्णन करता है। जब धूप ढल जाती है तो तुलसी के वन से पत्ते झरने लगते हैं। साँझ होने पर कनेर के फूल गिरते हैं और पूजा के समय ज्वार भी झरने लगती है। उस समय धान के दानों से दीपक जलाए जाते हैं और चारों ओर पूजा का पवित्र वातावरण बन जाता है।

(ख) आगे पुकारेगी सूनी डगरिया पीछे झुके वन-बेंत।

(i) पाठ और कवि का नाम लिखिए।

उत्तर: प्रस्तुत पंक्तियाँ ‘धानों का गीत’ पाठ से ली गई हैं। इसके कवि का नाम केदारनाथ सिंह है।

(ii) सूनी डगरिया से कवि का क्या आशय है ?

उत्तर: सूनी डगरिया से कवि का आशय खाली और सुनसान रास्तों से है। जब बहुत गर्मी होती है और बारिश नहीं होती, तब लोग घरों से बाहर नहीं निकलते। इसलिए रास्ते सूने और शांत हो जाते हैं।

भाषा बोध –

क) कविता में आए तत्सम शब्द और उनके तद्भव रूप इस प्रकार हैं —

  1. प्राणपरान / प्रान
  2. चन्द्रचंदा
  3. सूर्यसूरज
  4. संध्यासाँझ
  5. वनबन
  6. पूजापूज (बोलचाल में)
  7. अक्षिआँख / अँखड़ियाँ
  8. मार्गडगर / डगरिया
  9. क्षेत्रखेत
  10. धन्य / धान्यधान

ये सभी संस्कृत के मूल रूप तत्सम शब्द हैं और इनके बदले हुए बोलचाल के रूप तद्भव शब्द कहलाते हैं।

ख) इस कविता में प्राकृतिक वस्तुओं में मानवीय व्यवहार का आरोपण किया गया है जिसे मानवीकरण कहते हैं। जैसे – संझा पुकारेगी। इसी प्रकार के अन्य उदाहरणों को चुनिए। 

उत्तर :
कविता में प्रकृति की वस्तुओं को मनुष्य की तरह व्यवहार करते हुए दिखाया गया है। इसके कुछ अन्य उदाहरण इस प्रकार हैं —

  1. आगे पुकारेगी सूनी डगरिया।
  2. पीछे झुके वन-बेंत।
  3. चन्दा को बाँधेंगी कच्ची कलगियाँ।
  4. संझा पुकारेंगी गीली अँखड़ियाँ।

इन पंक्तियों में रास्ता, वन, कलगियाँ और संझा को मनुष्य की तरह काम करते हुए दिखाया गया है, इसलिए यह मानवीकरण अलंकार के उदाहरण हैं।

(ग) निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखिए 

1. बादल : मेघ, घन, जलद।

2. साँझ : संध्या, शाम, गोधूलि।

3. भोर : प्रभात, प्रातः, सवेरा।

4. वन : जंगल, अरण्य, कानन।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न : कवि ने बादलों का आह्वान क्यों किया है? कविता के माध्यम से बादलों का महत्व स्पष्ट कीजिए।

उत्तर :
कवि ने बादलों का आह्वान इसलिए किया है क्योंकि बादल मनुष्य और प्रकृति के जीवन के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। बादलों के आने से वर्षा होती है और वर्षा से धरती हरी-भरी हो जाती है। भारत एक कृषि प्रधान देश है, इसलिए खेती के लिए वर्षा बहुत जरूरी होती है। वर्षा के बिना खेत सूख जाते हैं और फसलें नहीं उग पातीं।

कविता में बताया गया है कि पानी मिलने से खेतों में धान की फसल लहलहाने लगती है। धान ही लोगों के जीवन का आधार है, इसलिए किसान बादलों के आने की प्रतीक्षा करते रहते हैं। जब बादल आकर वर्षा करते हैं तो सूनी धरती, पेड़-पौधे और खेत फिर से हरे-भरे हो जाते हैं।

इस प्रकार कवि ने कविता के माध्यम से यह बताया है कि बादल और वर्षा किसान तथा पूरे जीवन के लिए बहुत आवश्यक हैं। इसलिए कवि किसानों की ओर से बादलों को आने के लिए पुकारता है।

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