जीवन का झरना कविता का प्रश्न उत्तर ॥ Jeevan Ka Jharna Question Answer ॥ जीवन का झरना कविता का प्रश्न उत्तर क्लास 6

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :
प्रश्न 1. कवि ने जीवन की तुलना की है –
(क) नदी से
(ख) वायु से
(ग) झरने से
(घ) समुद्र से
उत्तर : (ग) झरने से
प्रश्न 2. निर्झर हमें क्या करने को कहता है ?
(क) आगे बढ़ने को
(ख) मस्ती करने को
(ग) सोचने को
(घ) विश्राम करने को
उत्तर : (क) आगे बढ़ने को
प्रश्न 3. जीवन रूपी निर्झर के दो तीर हैं –
(क) जय-पराजय
(ख) सुख-दुख
(ग) हानि-लाभ
(घ) उत्थान-पतन
उत्तर : (ख) सुख-दुख
लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर :
प्रश्न 1. झरना हमें क्या संदेश देता है ?
उत्तर :
झरना हमें यह संदेश देता है कि हमें हमेशा आगे बढ़ते रहना चाहिए। जैसे झरना लगातार बहता रहता है, वैसे ही हमें भी जीवन में मेहनत करते हुए रुकना नहीं चाहिए।
प्रश्न 2. निर्झर की धुन क्या है ?
उत्तर :
निर्झर की केवल एक ही धुन है—लगातार बहते रहना और आगे बढ़ते रहना।
प्रश्न 3. झरने की गति रुक जाने पर क्या होगा ?
उत्तर :
यदि झरना बहना बंद कर दे, तो उसका अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा।
प्रश्न 4. जीवन का आनंद किस बात में है ?
उत्तर :
जीवन का आनंद लगातार काम करते रहने और आगे बढ़ते रहने में है।
बोधमूलक प्रश्नोत्तर :
प्रश्न 1. कवि ने जीवन की तुलना निर्झर से किन कारणों से की है?
उत्तर :
कवि ने जीवन की तुलना झरने से इसलिए की है क्योंकि मनुष्य का जीवन झरने के समान होता है। जैसे झरना दो किनारों के बीच लगातार बहता रहता है, वैसे ही मनुष्य का जीवन भी सुख और दुख के बीच चलता रहता है। इसलिए कवि ने जीवन को झरने के समान बताया है।
प्रश्न 2. जीवन का झरना कविता का सारांश लिखिए?
‘जीवन का झरना’ कविता के कवि आरसी प्रसाद सिंह हैं। इस कविता में कवि ने मनुष्य के जीवन की तुलना झरने (निर्झर) से की है। जिस प्रकार झरना पहाड़ से निकलकर लगातार बहता हुआ आगे बढ़ता रहता है, उसी प्रकार मनुष्य का जीवन भी हमेशा आगे बढ़ते रहने का नाम है।
झरना अपने रास्ते में आने वाली चट्टानों, पत्थरों और पेड़ों से टकराता हुआ भी रुकता नहीं है। वह हर बाधा को पार करके आगे बढ़ता रहता है। इसी प्रकार मनुष्य के जीवन में भी सुख और दुःख आते रहते हैं, परन्तु मनुष्य को उनसे घबराना नहीं चाहिए और साहस के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहना चाहिए।
कवि यह भी बताते हैं कि गति ही जीवन है। जब तक झरना बहता रहता है, तब तक उसका अस्तित्व बना रहता है। यदि वह रुक जाए, तो उसका जीवन समाप्त हो जाता है। इसी प्रकार मनुष्य को भी अपने जीवन में हमेशा सक्रिय, परिश्रमी और गतिशील बने रहना चाहिए।
इस कविता के माध्यम से कवि हमें यह शिक्षा देते हैं कि मनुष्य को कभी रुकना नहीं चाहिए, बल्कि उत्साह और साहस के साथ निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए। यही सच्चे और सफल जीवन का मार्ग है।
प्रश्न 3. निर्झर का जन्म कहाँ होता है? वह अपनी यात्रा में किन-किन अवरोधों का सामना करता है ?
उत्तर :
निर्झर का जन्म पर्वत के अंदर से होता है। अपनी यात्रा के दौरान उसे कई बाधाओं का सामना करना पड़ता है। उसके रास्ते में पत्थर, कठोर चट्टानें और जंगल के पेड़ आ जाते हैं, लेकिन वह इन सभी बाधाओं को पार करके लगातार आगे बढ़ता रहता है।
निर्देशानुसार उत्तर दीजिए :
(क) यह जीवन क्या ……….. मनमानी है।
(i) इस अंश के रचनाकार कौन हैं?
उत्तर :
इस अंश के रचनाकार आरसी प्रसाद सिंह हैं।
(ii) जीवन की उपमा किससे दी गई है ?
उत्तर :
जीवन की उपमा निर्झर (झरने) से दी गई है।
(iii) उपर्युक्त अंश का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
कवि इस अंश में कहते हैं कि मनुष्य का जीवन झरने के समान है। जैसे झरना मस्ती से बहता हुआ अपने रास्ते पर चलता रहता है, वैसे ही जीवन भी आगे बढ़ता रहता है। जीवन में सुख और दुःख दोनों आते हैं, लेकिन इनके बीच भी जीवन अपनी गति से चलता रहता है। इसलिए हमें भी खुशी और कठिनाई दोनों स्थितियों में आगे बढ़ते रहना चाहिए।
(ख) चलना है केवल चलना है ……….. निर्झर झर कर यह कहता है।
(i) यह अंश किस पाठ से लिया गया है ?
उत्तर :
यह अंश ‘जीवन का झरना’ पाठ से लिया गया है।
(ii) उपर्युक्त अंश का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
इस अंश में कवि कहते हैं कि जीवन का नियम है हमेशा आगे बढ़ते रहना। जैसे झरना लगातार बहता रहता है, वैसे ही मनुष्य को भी जीवन में चलते रहना चाहिए। यदि हम रुक जाते हैं और प्रयास करना छोड़ देते हैं, तो जीवन का अर्थ समाप्त हो जाता है। इसलिए हमें हर परिस्थिति में मेहनत करते हुए आगे बढ़ते रहना चाहिए।
(ग) बाधा के रोड़ों से लड़ता ……….. यौवन से मदमाता।
(i) बाधा के रोड़ों से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर :
बाधा के रोड़ों से तात्पर्य उन पत्थरों और कठोर टुकड़ों से है जो निर्झर के रास्ते में आकर उसका मार्ग रोकते हैं। लेकिन निर्झर अपनी शक्ति से उनसे टकराकर भी रुकता नहीं है और आगे बढ़ता रहता है। इससे हमें भी यह सीख मिलती है कि जीवन की कठिनाइयों से डरना नहीं चाहिए और आगे बढ़ते रहना चाहिए।
(ii) इस अंश का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
इस अंश में कवि बताते हैं कि निर्झर अपने रास्ते में आने वाली सभी बाधाओं से लड़ते हुए आगे बढ़ता रहता है। उसके रास्ते में पत्थर, पेड़ और चट्टानें आती हैं, लेकिन वह उनसे टकराकर भी रुकता नहीं है। इसी तरह मनुष्य को भी जीवन में आने वाली कठिनाइयों से डरना नहीं चाहिए, बल्कि साहस के साथ आगे बढ़ते रहना चाहिए।
भाषा-बोध :
(क) लिंग निर्णय कीजिए :
- जीवन — पुल्लिंग
- पानी — पुल्लिंग
- गति — स्त्रीलिंग
- चट्टान — स्त्रीलिंग
(ख) दिये गये शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखिए :
- पानी — जल, नीर, वारि
- पेड़ — वृक्ष, तरु, पादप
- मानव — मनुष्य, इंसान, नर
- जग — संसार, विश्व, दुनिया
- तीर — किनारा, तट, कूल
- गिरि — पर्वत, पहाड़, शैल
(ग) निम्न शब्दों के विलोम शब्द लिखिए :
- समतल — ऊबड़-खाबड़
- सुख — दुःख
- अन्तर — बाह्य
- गति — स्थिरता
- दुर्दिन — सुदिन
(घ) निम्नलिखित शब्दों के वचन बदलिए :
- तारों — तारा
- पेड़ों — पेड़
- चट्टानों — चट्टान
- राह — राहें
- बाधा — बाधाएँ
- मानव — मानवों
दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर :
प्रश्न : कवि ने इस कविता में जीवन की तुलना झरने से किस प्रकार की है? यह कविता हमें क्या संदेश देती है?
उत्तर :
प्रस्तुत कविता में कवि ने मनुष्य के जीवन की तुलना झरने से की है। कवि झरने के माध्यम से यह समझाना चाहते हैं कि मनुष्य का जीवन भी झरने की तरह निरंतर चलता रहता है। झरने का पानी उसकी मस्ती और आनंद का प्रतीक है। उसी प्रकार जीवन में सुख और दुःख दो किनारों की तरह होते हैं, जिनके बीच मनुष्य का जीवन चलता रहता है।
झरना पर्वत से निकलकर कई स्थानों और घाटियों से गुजरता हुआ आगे बढ़ता है। उसके रास्ते में पत्थर, पेड़ और चट्टानें भी आती हैं, फिर भी वह रुकता नहीं है और निरंतर बहता रहता है। उसी प्रकार मनुष्य के जीवन में भी कई कठिनाइयाँ और समस्याएँ आती हैं, लेकिन उसे साहस और मेहनत से उन बाधाओं को पार करते हुए अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहना चाहिए।
झरने की पहचान उसकी गति से होती है। यदि झरना बहना बंद कर दे, तो उसका अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। इसी तरह मनुष्य के जीवन में भी काम करते रहना और आगे बढ़ते रहना बहुत आवश्यक है। यदि मनुष्य प्रयास करना छोड़ दे और रुक जाए, तो उसका जीवन निरर्थक हो जाता है।
इस कविता से हमें यह संदेश मिलता है कि हमें जीवन में हमेशा सक्रिय और गतिशील रहना चाहिए। हमें कठिनाइयों से डरना नहीं चाहिए, बल्कि उनका सामना करते हुए अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ते रहना चाहिए। निरंतर परिश्रम और आगे बढ़ते रहने में ही जीवन का सच्चा आनंद और सफलता छिपी होती है।
इसे भी पढ़ें :
- जीवन का झरना कविता की व्याख्या ॥ Jivan Ka Jharna Kavita Ki Vyakhya
- धानों का गीत कविता का व्याख्या ॥ Dhano Ka Geet Vyakhya ॥ धानों का गीत कविता का सारांश
- भगवान के डाकिए कविता की व्याख्या ॥ भगवान के डाकिए कविता की व्याख्या क्लास 6 ॥ Bhagwan Ke Dakiye Kavita Ki Vyakhya
- वह चिड़िया जो कविता की व्याख्या ॥ Vah Chidiya Jo Kavita Vyakhya Class 6
- इनसे सीखो कविता का व्याख्या क्लास 6 ॥ इनसे सीखो कविता का भावार्थ ॥ Inse Sikho Kavita Ka Vyakhya
- वृंद के दोहे की व्याख्या क्लास 6॥ वृंद के दोहे का व्याख्या क्लास 6 ॥ Vrind Ke Dohe Ki Vyakhya Class 6
- इनसे सीखो कविता Question Answer Class 6 ॥ Inse Sikho Kavita Ka Question Answer
- वृन्द के दोहे Class 6 Question Answer ॥ Vrind Ke Dohe Class 6 Question Answer
- भगवान के डाकिए प्रश्न उत्तर ॥ भगवान के डाकिए Question Answer Class 6 ॥ Bhagwan Ke Dakiye Question Answer
- धानों का गीत कविता का प्रश्न उत्तर क्लास 6 ॥ Dhano Ka Geet Question Answer Class 6