दो भाई कहानी का प्रश्न उत्तर क्लास 6॥ Do Bhai Kahani Ka Question Answer

दो भाई कहानी का प्रश्न उत्तर क्लास 6॥ Do Bhai Kahani Ka Question Answer

दो भाई कहानी का प्रश्न उत्तर क्लास 6॥ Do Bhai Kahani Ka Question Answer

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1. कलावती के कितने बेटे थे ?
(क) एक
(ख) दो
(ग) तीन
(घ) चार
उत्तर :
(ख) दो

प्रश्न 2. कलावती के दोनों बेटों का नाम था –
(क) माधव और जाधव
(ख) माधव और राघव
(ग) माधव और केदार
(घ) केदार और जाधव
उत्तर :
(ग) माधव और केदार

प्रश्न 3. कलावती के दोनों बहुओं का नाम था –
(क) गीता और सीता
(ख) चंपा और श्यामा
(ग) गीता और चंपा
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) चंपा और श्यामा।

प्रश्न 4. केदार क्या पढ़ रहे थे?
(क) गीता
(ख) रामायण
(ग) महाभारत
(घ) कुरान
उत्तर :
(ख) रामायण।

प्रश्न 5. केदार की बुद्धि थी –
(क) सुस्त
(ख) चुस्त
(ग) मंद
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) चुस्त ।

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1. माधव और केदार में बड़ा भाई कौन था ?
उत्तर : माधव और केदार में केदार बड़ा भाई था।

प्रश्न 2. माधव के कितने पुत्र एवं पुत्रियाँ थीं ?
उत्तर : माधव के चार पुत्र और चार पुत्रियाँ थीं।

प्रश्न 3. माधव को किसकी लालसा थी ?
उत्तर : माधव को धन-सम्पत्ति की लालसा थी।

प्रश्न 4. केदार को किसकी अभिलाषा थी ?
उत्तर : केदार को संतान की अभिलाषा थी।

प्रश्न 5. बेचारी चंपा को चूल्हे में जलना और चक्की में क्यों पिसना पड़ता था ?
उत्तर : श्यामा अपने बच्चों को सँवारने और उनकी देखभाल में व्यस्त रहती थी, इसलिए घर के अधिकांश काम चंपा को ही करने पड़ते थे, इसी कारण उसे चूल्हे में जलना और चक्की में पिसना पड़ता था।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1. कलावती का स्वभाव कैसा था ?
उत्तर : कलावती का स्वभाव बहुत ही प्रेमपूर्ण, स्नेहमयी, संवेदनशील और न्यायप्रिय था। वह अपने दोनों बेटों से अत्यंत प्रेम करती थी और बचपन में उन्हें बड़े दुलार से पालती-पोसती थी। उसकी इच्छा थी कि परिवार में हमेशा आपसी प्रेम, एकता और शांति बनी रहे। वह अपनी दोनों बहुओं के गुण-दोष को समझती थी, इसलिए कभी उनसे प्रसन्न होती थी तो कभी उनके व्यवहार से दुखी भी हो जाती थी।

कलावती का हृदय बहुत कोमल था। जब उसके दोनों बेटों के बीच झगड़ा और दूरी बढ़ने लगी, तो वह बहुत दुखी रहती थी और रो-रोकर अपना दुःख प्रकट करती थी। वह परिवार को जोड़कर रखना चाहती थी, परंतु परिस्थितियों के कारण ऐसा नहीं कर सकी। अंत में अपने बेटों के आपसी वैमनस्य को देखकर उसका हृदय शोक और पीड़ा से भर गया

प्रश्न 2. कलावती के दोनों बेटे वैमनस्य के शिकार कैसे हो गए ?
उत्तर : कलावती के दोनों बेटे केदार और माधव बचपन में एक-दूसरे से बहुत प्रेम करते थे, परन्तु विवाह के बाद उनकी पत्नियों के भिन्न स्वभाव और आपसी मनमुटाव के कारण घर में तनाव बढ़ने लगा। चम्पा के तीखे स्वभाव और श्यामा की सहनशीलता के बीच असंतुलन था, जिससे झगड़े बढ़ते गए।

इसके साथ ही केदार और माधव की अलग-अलग इच्छाएँ (केदार को संतान की अभिलाषा और माधव को धन-सम्पत्ति की लालसा) भी उनके बीच दूरी का कारण बनीं। धीरे-धीरे यह स्थिति ईर्ष्या और द्वेष में बदल गई, और अंततः दोनों भाई वैमनस्य के शिकार हो गए।

प्रश्न 3. माधव एवं केदार की पत्नियाँ कैसी थीं ?
उत्तर : केदार की पत्नी चम्पा बहुत बातूनी, चंचल और तीखे स्वभाव वाली थी। वह जल्दी क्रोधित हो जाती थी और अपने मन की बात स्पष्ट रूप से कहती थी।

वहीं माधव की पत्नी श्यामा शांत, सहनशील, मृदुभाषी और सरल स्वभाव की थी। वह घर के कामों में लगी रहती थी और चम्पा की कटु बातों को भी चुपचाप सह लेती थी।

प्रश्न 4. माधव को केदार ने किस एवज में पैसे दिए ?
उत्तर : जब माधव आर्थिक संकट में पड़ गया और उसे रुपयों की आवश्यकता हुई, तब वह सहायता के लिए अपने बड़े भाई केदार के पास गया। केदार और उसकी पत्नी चम्पा ने चालाकी से यह शर्त रखी कि रुपये माधव के घर (दो कोठरियों) को गिरवी रखने के बदले ही दिए जाएँगे।

अंततः मजबूरी में माधव को अपना घर गिरवी रखने के लिए तैयार होना पड़ा। इस प्रकार केदार ने भाई की सहायता तो की, परन्तु वह सहायता निःस्वार्थ न होकर स्वार्थ और शर्तों पर आधारित थी, जिससे दोनों भाइयों के बीच विश्वास और भी कम हो गया।

प्रश्न 5. केदार के व्यवहार से कलावती दु:खी क्यों थी ?
उत्तर : केदार के व्यवहार से कलावती इसलिए दुःखी थी क्योंकि उसने अपने छोटे भाई माधव के साथ भाईचारे और प्रेम का व्यवहार न करके स्वार्थपूर्ण और कठोर व्यवहार किया। जब माधव संकट में था, तब केदार ने उसकी निःस्वार्थ सहायता करने के बजाय उसका घर गिरवी रखवाकर पैसे दिए

कलावती चाहती थी कि दोनों भाई प्रेम और एकता से रहें, लेकिन केदार के इस व्यवहार से भाइयों के बीच दूरी, अविश्वास और वैमनस्य और बढ़ गया। यही देखकर वह बहुत दुःखी हो गई।

प्रश्न 6. ‘हृदय चाहे रोए पर होंठ हँसते रहें’ कहने से क्या तात्पर्य है?
उत्तर : इसका तात्पर्य यह है कि मनुष्य भीतर से कितना ही दुःखी और परेशान क्यों न हो, फिर भी वह समाज के सामने अपनी इज्जत और मर्यादा बनाए रखने के लिए खुश होने का दिखावा करता है

माधव की स्थिति भी ऐसी ही थी—वह आर्थिक संकट और परेशानियों से घिरा हुआ था, उसका हृदय दुःखी था, परन्तु समाज में सम्मान बनाए रखने के लिए वह बाहरी रूप से हँसता और सामान्य व्यवहार करता था

विचार और कल्पना 

क) भाई-भाई के बीच कुटुंब सा व्यवहार होना चाहिए। हमेशा एक दूसरे के सुख एवं दुःख में साथ देना चाहिए। 

उत्तर : भाई-भाई के बीच कुटुंब जैसा प्रेमपूर्ण, सहयोगपूर्ण और विश्वास से भरा व्यवहार होना चाहिए। उन्हें एक-दूसरे के प्रति स्नेह, सम्मान और समझदारी रखनी चाहिए। जीवन में चाहे सुख का समय हो या दुःख का, भाइयों को हमेशा एक-दूसरे का साथ निभाना चाहिए और कठिन परिस्थितियों में एक-दूसरे की सहायता करनी चाहिए।

आपसी झगड़े, ईर्ष्या और द्वेष से दूर रहकर उन्हें मिल-जुलकर रहना चाहिए, ताकि परिवार में शांति और खुशहाली बनी रहे। भाईचारे का सच्चा अर्थ यही है कि वे हर परिस्थिति में एक-दूसरे के साथ खड़े रहें और परिवार की एकता और सम्मान को बनाए रखें।

(ख) क्या आप ऐसे किसी परिवार को जानते हैं जिनका जीवन इन दोनों भाइयों से मेल खाता हो? समझाकर लिखिए।

उत्तर : हाँ, मैंने अपने आसपास ऐसे परिवार देखे हैं जिनका जीवन इन दोनों भाइयों से मेल खाता है। एक ही परिवार में दो भाई बचपन में बहुत प्रेम से रहते थे, परन्तु विवाह के बाद उनकी पत्नियों के अलग-अलग स्वभाव और आपसी मनमुटाव के कारण उनके संबंधों में धीरे-धीरे दूरी आ गई। छोटी-छोटी बातों पर झगड़े होने लगे और अंततः वे अलग रहने लगे।

समय के साथ उनके बीच प्रेम के स्थान पर ईर्ष्या और द्वेष आ गया। वे एक-दूसरे के सुख-दुःख में साथ देने के बजाय केवल औपचारिक संबंध निभाने लगे। इससे परिवार की शांति और एकता समाप्त हो गई

इस प्रकार यह उदाहरण हमें सिखाता है कि यदि परिवार में आपसी समझ, सहनशीलता और प्रेम न हो, तो रिश्ते कमजोर हो जाते हैं। इसलिए हमेशा मिल-जुलकर रहना और एक-दूसरे का साथ देना बहुत आवश्यक है।

भाषा – बोध 

प्रश्न (क) पाठ में आये पाँच-पाँच संज्ञा, सर्वनाम और विशेषण को चुनकर लिखिए।

उत्तर :

(1) संज्ञा (Noun) :

  1. कलावती
  2. केदार
  3. माधव
  4. चम्पा
  5. श्यामा

(2) सर्वनाम (Pronoun) :

  1. वह
  2. उसे
  3. उसकी
  4. अपने
  5. कोई

(3) विशेषण (Adjective) :

  1. बड़ा
  2. छोटा
  3. चंचल
  4. शांत
  5. मृदुभाषी

(ख) पर्यायवाची शब्द लिखिए –  प्रसन्न, मुरझाया, अभिलाषा, छोटा, भाई

उत्तर :

  1. प्रसन्न – खुश, आनंदित, हर्षित
  2. मुरझाया – कुम्हलाया, सूखा, निस्तेज
  3. अभिलाषा – इच्छा, आकांक्षा, कामना
  4. छोटा – लघु, नन्हा, क्षुद्र
  5. भाई – भ्राता, सहोदर, बंधु

प्रश्न : दो भाई कहानी का सारांश लिखिए।

उत्तर :
‘दो भाई’ कहानी में एक परिवार के माध्यम से भाईचारे, प्रेम और आपसी संबंधों के बदलते रूप को बहुत मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। कहानी की शुरुआत कलावती और उसके दो बेटों केदार और माधव से होती है। बचपन में दोनों भाइयों के बीच गहरा प्रेम और अपनापन था। वे साथ खेलते, साथ पढ़ते, साथ खाते-पीते और एक-दूसरे के बिना रह नहीं पाते थे। कलावती उन्हें बड़े दुलार से पालती थी और उनके बीच के प्रेम को देखकर गर्व महसूस करती थी।

समय के साथ दोनों बड़े हुए और उनका विवाह हो गया। केदार की पत्नी चम्पा चंचल, तेज और कुछ कठोर स्वभाव की थी, जबकि माधव की पत्नी श्यामा शांत, सहनशील और मृदुभाषी थी। दोनों के स्वभाव में अंतर होने के कारण घर में धीरे-धीरे तनाव और कलह उत्पन्न होने लगा। छोटी-छोटी बातों पर झगड़े होने लगे और यह स्थिति बढ़ते-बढ़ते इतनी गंभीर हो गई कि एक ही घर में रहते हुए भी दोनों भाइयों के चूल्हे अलग हो गए

इसके साथ ही केदार और माधव की इच्छाएँ भी भिन्न थीं—केदार को संतान की अभिलाषा थी, जबकि माधव को धन-सम्पत्ति की लालसा थी। इन भिन्न इच्छाओं और परिस्थितियों ने उनके बीच ईर्ष्या और द्वेष को जन्म दिया। धीरे-धीरे उनका भाईचारा समाप्त हो गया और वे एक-दूसरे से दूर हो गए। अब उनके बीच केवल नाम का रिश्ता रह गया था।

समय बीतने पर माधव आर्थिक रूप से कमजोर हो गया। उसके ऊपर परिवार की जिम्मेदारियाँ बढ़ गईं और वह संकट में पड़ गया। ऐसे समय में उसने अपने बड़े भाई केदार से सहायता माँगी। केदार ने सहायता तो की, परन्तु निःस्वार्थ भाव से नहीं, बल्कि माधव का घर गिरवी रखवाकर पैसे दिए। इससे दोनों भाइयों के बीच का विश्वास और अधिक टूट गया और उनके संबंध और भी कमजोर हो गए।

अंत में माँ कलावती अपने बेटों के इस बदलते व्यवहार को देखकर अत्यंत दुखी होती है। उसे अपने उन दिनों की याद आती है जब दोनों बेटे एक-दूसरे के लिए प्राण देने को तैयार रहते थे। अब वही बेटे एक-दूसरे से दूर हो गए हैं और उनमें प्रेम का स्थान स्वार्थ ने ले लिया है।

यह कहानी हमें सिखाती है कि आपसी प्रेम, विश्वास और एकता ही परिवार की सबसे बड़ी ताकत होती है। यदि परिवार के सदस्यों में ईर्ष्या, द्वेष और स्वार्थ आ जाए, तो सबसे मजबूत संबंध भी टूट जाते हैं। इसलिए हमें हमेशा अपने संबंधों को प्रेम और समझदारी से निभाना चाहिए।

प्रश्न : मुंशी प्रेमचंद का जीवन परिचय लिखिए।

उत्तर :
मुंशी प्रेमचंद हिंदी और उर्दू के महान साहित्यकार थे, जिन्हें “उपन्यास सम्राट” कहा जाता है। उनका वास्तविक नाम धनपत राय श्रीवास्तव था। उनका जन्म 31 जुलाई 1880 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के लमही गाँव में हुआ था।

प्रेमचंद का बचपन अत्यंत कठिन परिस्थितियों में बीता। उनके पिता एक डाकघर में क्लर्क थे और माता का देहांत बचपन में ही हो गया था। आर्थिक तंगी के कारण उन्हें छोटी उम्र से ही संघर्ष करना पड़ा। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा उर्दू और फारसी में प्राप्त की तथा आगे चलकर अध्यापन कार्य से जुड़ गए।

प्रेमचंद ने अपने साहित्यिक जीवन की शुरुआत उर्दू भाषा से की और “नवाब राय” नाम से लिखना शुरू किया। बाद में वे हिंदी की ओर आए और “प्रेमचंद” नाम से प्रसिद्ध हुए। उनकी रचनाओं में गरीबी, शोषण, सामाजिक कुरीतियाँ, किसान जीवन और मानवीय संवेदनाएँ प्रमुख रूप से दिखाई देती हैं।

उनकी प्रमुख कृतियों में गोदान, गबन, सेवासदन, रंगभूमि, कर्मभूमि जैसे उपन्यास और ईदगाह, पूस की रात, पंच परमेश्वर, कफन जैसी प्रसिद्ध कहानियाँ शामिल हैं। उनकी भाषा सरल, सहज और जनसाधारण के जीवन से जुड़ी हुई थी, जिससे उनकी रचनाएँ बहुत लोकप्रिय हुईं।

मुंशी प्रेमचंद का निधन 8 अक्टूबर 1936 को हुआ, लेकिन उनकी रचनाएँ आज भी समाज को प्रेरणा देती हैं। वे भारतीय साहित्य के ऐसे महान लेखक थे, जिन्होंने अपने लेखन के माध्यम से समाज की सच्चाई को उजागर किया और साहित्य को नई दिशा दी।

प्रश्न : इस पाठ में आए कठिन शब्दों का शब्दार्थ

उत्तर :

  1. सুহावनी – मन को अच्छी लगने वाली
  2. जाँघों – पैर का ऊपरी भाग
  3. तोतली बोली – बच्चों की मीठी और अस्पष्ट भाषा
  4. हृदय – दिल
  5. उमंग – उत्साह, खुशी
  6. अभिलाषा – इच्छा, चाह
  7. संतानवान – जिसके बच्चे हों
  8. कुटनीति (कूटनीति) – चालाकी से किया गया व्यवहार
  9. द्वेष – बैर, जलन
  10. सहनशीलता – सहने की शक्ति
  11. कटु शब्द – कड़वे वचन
  12. वैमनस्य – आपसी दुश्मनी
  13. मर्यादा – इज्जत, सम्मान
  14. आमदनी – आय, कमाई
  15. दरिद्रता – गरीबी
  16. धरोहर – अमानत, विरासत
  17. गिरों (गिरवी) – किसी वस्तु को उधार के बदले रखना
  18. विवश – मजबूर
  19. मर्मभेदी – दिल को चुभने वाला
  20. कुशलता – दक्षता, निपुणता

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