चिड़िया और चुरुंगुन (chidiya aur churungun kavita question answer class 6)

चिड़िया और चुरुंगुन (chidiya aur churungun kavita question answer class 6)

chidiya aur churungun kavita question answer class 6

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चिड़िया और चुरुंगुन

हरिवंश राय बच्चन

छोड़ घोंसला बाहर आया
देखी डालें देखे पात
और सुनी जो पत्ते हिलमिल
करते हैं आपस में बात
माँ, क्या मुझको उड़ना आया ?
नहीं, चुरुंगुन, तू
भरमाया”

व्याख्या :- कवि ने चिड़िया के बच्ची के बचपन के बारे में बताया है  जिसका नाम चुरुंगुन है चुरुंगुन हर चीज़ों को जनना चाहता है और बार-बार अपनी माँ से उड़ने के बारे में पूछता रहता है वह चाहता है कि वह जल्दी से उड़ना सीख जाए  ताकि वह पूरी दुनिया देख सके और उसके बारे में जान सके। इस पंक्ति में यह बताया गया है कि चुरुंगुन घोंसला  से बाहर आया  है और वह डाली और पत्ते को देखता है साथ ही पत्ते के हिलने से जो आवाज निकलती है उसे भी सुनता है और उन्हे लगता है कि वे  एक दूसरे से बाते कर रहे है यानी वे आपास में बाते कर रहे है। इन सब को देखकर उसे लगता है कि उसे उड़ना आ गया है और वह अपनी माँ से पूछता है कि माँ क्या मुझे उड़ना आ गया है तो उसकी माँ उससे कहती है कि नहीं तुम्हें अभी उड़ना नहीं आया है ये तो तुम्हारा भ्रम है ।  

डाली से डाली पर पहुँचा,
देखी कलियाँ, देखे फूल,
ऊपर उठकर फुनगी जानी,
नीचे झुककर जाना मूल
माँ, क्या मुझको उड़ना आया ?
नहीं, चुरुंगुन, तू
भरमाया”

व्याख्या :- अब चुरुंगुन बड़ा हो गया है वह एक डाली से दूसरी डाली पर कूदता है और वह कलियाँ और फूल देखता है। चुरुंगुन थोड़ा ऊपर जाता है तो वह फुनगी यानी कोमल पत्तियों को देखता है और उसे जानता या पहचानता है फिर वह जब पेड़ के नीचे झाँकता है तो उसे जड़ों के बारे में पता चलता है इन सारी चीजों को देखते हुए उसे लगता है कि उसे उड़ना आ गया है और वह अपनी माँ से पूछता है कि माँ क्या मुझको अब उड़ना आ गया है तो उसकी माँ फिर उन्हे कहती है कि नहीं तुम्हें अभी भी उड़ना नहीं आया है ये तो तुम्हारे मन का भ्रम है।



कच्चे-पक्के फल पहचाने,
खाए और गिराए काट,
खाने- गाने के सब साथी,
देख रहे हैं मेरी बाट
माँ , क्या मुझको उड़ना आया?
नहीं, चुरुंगुन, तू
भरमाया”

 व्याख्या  :- चुरुंगुन को अब कच्चे और पक्के फल को पहचाना भी आ गया है वह कुछ फल को खाता है और कुछ फल को काट कर गिरा देता है और कहता है कि मुझसे मिलकर खेलने और खाने वाले मेरे साथी मेरा प्रतीक्षा कर रहे है इस लिए मुझे वह जाना है। फिर वह अपनी माँ से पूछता है कि क्या माँ मुझे अब उड़ना आ गया है तो उसकी माँ उसे फिर कहती है नहीं चुरुंगुर तुम्हें  अभी भी उड़ना नहीं आया है ये तुम्हारा भ्रम है ।  



उस तरु से इस तरु पर आता
जाता हूँ धरती की ओर
दाना कोई कहीं पड़ा हो
चुन लाता हूँ ठोक ठठोर ;
माँ , क्या मुझको उड़ना आया?
नहीं,चुरुंगुन, तू भरमाया




व्याख्या: इस पंक्ति के माध्यम से कवि कहते है कि चुरुंगुन अब इतना बड़ा हो गया है कि वे एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर आता जाता रहता है।  कभी-कभी वह धरती पर भी जाता है और कहता है कि अगर धरती पर कहीं कोई दाना पड़ा रहता है तो उसे भी इकट्टा कर चुन लता हूँ चुरुंगुन को लगता है कि जब मैं एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर आ जा रहा हूँ और धरती से भी दाना ठठोर कर ला पा रहा हूँ तो मुझे उड़ना आ गया है और वह अपनी माँ से कहता है कि क्या माँ अब मुझे उड़ना आ गया है तो उसकी माँ उससे कहती है कि नहीं चुरुंगुन तुम्हें अभी भी उड़ना नहीं आया है ये भी तुम्हारे मन का भ्रम है ।  

मैं नीले अज्ञात गगन की
सुनता हूँ अनिवार पुकार
कोई अंदर से कहता है
उड़ जा, उड़ता जा पर मार
माँ , क्या मुझको उड़ना आया?
“आज सुफल हैं तेरे डैने ,
आज सुफल है तेरी काया”




व्याख्या :- इस पंक्ति के माध्यम से यह बताया गया है कि चुरुंगुन को ऐसा लगता है कि उसे अनजान नीला आसमान उसे लगातार पुकार रहा है उसे लगता है कि उसके अंदर से कोई शक्ति कह रही है कि अपने पंख में इतना ज़ोर लगा और उड़ जा और पंख फड़फाड़ते हुए उड़ता ही जा। चुरुंगुन माँ से पूछता है कि माँ क्या मुझको उड़ना आया तो उनके इन बातों को सुन कर माँ कहती है कि आज में कह सकती हूँ कि आज तुम्हारे डैने इतने मजबूत हो गए है और तुम्हारे शरीर में इतना ताकत आ गया है कि तुम अब उड़ सकते हो और उड़ने का पूरा-पूरा आनंद उठा सकते हो ।
शब्द-अर्थ :
भरमाया – भ्रम में पड़ना, संदेह होना
मूल – जड़
अज्ञात – अनजान
डैने – बड़े पंख
फुनगी – पेड़ कि शाखा का आगे का भाग, कोमल कोमल
पत्ती
ठोक ठठोर – ठोक बजाकर
अनिवार – लगातार
बाट – रास्ता  
 

हरिवंश राय बच्चन के जीवन परिचय

 

चिड़िया और चुरुंगुन कविता के कवि  हरिवंशराय बच्चन जी है। उनका जन्म इलाहाबाद के पास प्रतापगढ़ जिले के एक छोटे से गाँव में  एक गरीब परिवार में  27 नवंबर 1907 में  हुआ था ।  इनके पिता का नाम प्रताप नारायन श्रीवास्तव था तथा माता का नाम सरस्वती देवी था । इन को बाल्यकाल में बच्चन कहा जाता था जिसका शाब्दिक अर्थ बच्चा या संतान होता है । बाद में ये इसी नाम से महशूर हुए । हरिवंश राय ने 1938 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से अँग्रेजी साहित्य में एम॰ ए किया तथा इलाहाबाद विश्वविद्यालय में प्रवक्ता रहे । 1926 में हरिवंश राय की शादी श्यामा से हुई थी जिनका टीबी की लंबी बीमारी के बाद 1936 में निधन हो गया। हरिवंश राय के बेटे का अमिताभ बच्चन बॉलीवुड के महशूर अभिनेता बनकर उभरे।
                           हरिवंश राय अपने जीवनकाल में बहुत से कविताए, कहानियाँ, उपन्यास, निबंध तथा बाल कथाए लिखें ।  1935 में छपी मधुशाला के लिए बच्चन साहब को आज भी याद किया जाता है।  इनकी प्रमुख रचनाएँ हैं – मधुशाला , दो चट्टानें, मधुबाला, मधुकलश , निशा निमंत्रण, धार के इधर – उधर इसके अलावा उन्होने चार आत्मकथा भी लिखी थी । बच्चन को भारत सरकार द्वारा 1976 में साहित्य तथा शिक्षा के क्षेत्र में पद्म भूषण से साम्मानित किया गया था। 18 जनवरी ,2003 में इन का निधन हो गया ।

1. मौखिक प्रश्न

क) घोसला छोड़ कर कौन बाहर आया ?
उत्तर : घोंसला छोड़ कर चुरुंगुन बाहर आया ।

ख) माँ से हर बार चुरुंगुन क्या पूछता है?
उत्तर : माँ से हर बार चुरुंगुन पूछता कि क्या माँ मुझे उड़ना आ गया है।

ग) माँ चुरुंगुन के प्रश्नों का क्या जवाब देती है ?
उत्तर : माँ चुरुंगुन के प्रश्नों का जवाब देते हुए कहती है कि तुम्हें उड़ना नहीं आया है ये तुम्हारे मन का भ्रम है ।

घ) चुरुंगुन पेड़ के ऊपर उठकर किसको जान पता है ?
उत्तर : कोमल कोमल पत्तियों को जाना ।

2.लिखित प्रश्न

 क) कविता में चुरुंगुन का स्वभाव कैसा है ?

उत्तर : कविता में चुरुंगुन का स्वभाव चंचल है साथ ही हर चीज़ को जानने कि ईच्छा रखता है उनके अंदर उड़ने कि ताकत नहीं है फिर भी वह उड़ना चाहता है वे कभी शांत नहीं रहता है कभी एक डाली जाता है तो कभी दूसरी डाली पर जाता है  और हमेशा अपनी माँ से पूछता रहता है कि क्या माँ मुझे अब उड़ना आ गया है ?

ख) चुरुंगुन की बाट कौन देखता है और क्यों ?

उत्तर: चुरुंगुन की बाट उनके साथी देख रहे है क्योंकि चुरुंगुन उनके साथ खेलता और खाता है।

ग) चुरुंगुन को किस अज्ञात कि पुकार सुनाई देती है ?

उत्तर: चुरुंगुन को अज्ञात नीले आसमान कि पुकार सुनाई देती है ।

घ) माँ अंत में चुरुंगुन के उड़ने के लिए हाँ क्यों करती है ?

उत्तर: जब चुरुंगुन माँ को ये बताता है कि मुझे अनजान नीले आकाश से आवाज़ आती है । मानो वह मुझसे कह रही हो कि तू मेरे पास आ । इस पुकार को सुनकर मेरा अन्तरमन भी उड़ने के लिए चित्कार उठता है और मैं उड़ने के लिए बैचेन हो जाता हूँ । यह पुकार मुझे बार बार आ कर उड़ने के लिए प्रेरित करती है और कहती है कि तू आकाश में अपने पंखो को ऐसे मार कि तू उड़ता ही चला जाए। और अपनी माँ से पूछता है कि माँ अब क्या मैं कह सकता हूँ कि मुझे उड़ना आ गया है । माँ चुरुंगुन कि बातों को सुन कर प्रसन्न हो जाती है और कहती है कि बेटे आज तेरे पंख सफलता के शिखर पर चढ़ रहे है और तेरी काया सफल हो गई है तेरे बातों से ये सिद्ध हो गया है कि तू एक सच्चा पक्षी है और उड़ना तेरी प्रवृति है अतः आज मैं कह सकती हूँ कि तुम्हें उड़ना आ गया है अब तुम उड़ना जान गए हो ।  
3. कविता कि पंक्तियों की प्रसंग सहित व्याख्या करो ।

डाली से डाली पर पहुँचा,
देखी कलियाँ, देखे फूल,
ऊपर उठकर फुनगी जानी,
नीचे झुककर जाना मूल
माँ, क्या मुझको उड़ना आया ?
नहीं, चुरुंगुन, तू भरमाया”

प्रसंग प्रस्तुत पंक्ति हरिवंश राय बच्चन द्वारा लिखित कविता चिड़िया और चुरुंगुन से लिया गया है। चुरुंगुन अभी छोटा है लेकिन उसमें उड़ने की चाहत है और वह अपनी माँ से हर बार पूछता रहता है कि  माँ क्या मुझको उड़ना आया तो उसकी माँ उसे हर बार कहती है कि तुम्हें अभी उड़ना नहीं आया है।
व्याख्या – अब चुरुंगुन बड़ा हो गया है वह एक डाली से दूसरी डाली पर कूदता है और वह कलियाँ और फूल देखता है। चुरुंगुन थोड़ा ऊपर जाता है तो वह फुनगी यानी कोमल पत्तियों को देखता है और उसे जानता या पहचानता है फिर वह जब पेड़ के नीचे झाँकता है तो उसे जड़ों के बारे में पता चलता है इन सारी चीजों को देखते हुए उसे लगता है कि उसे उड़ना आ गया है और वह अपनी माँ से पूछता है कि माँ क्या मुझको अब उड़ना आ गया है तो उसकी माँ फिर उन्हे कहती है कि नहीं तुम्हें अभी भी उड़ना नहीं आया है ये तो तुम्हारे मन का भ्रम है।

उस तरु से इस तरु पर आता

जाता हूँधरती की ओर दाना कोई

कहीं पड़ा हो चुन लाता
हूँ ठोक ठठोर
; माँ ,
क्या मुझको उड़ना आया
?
नहीं, चुरुंगुन, तू भरमाया

प्रसंग प्रस्तुत पंक्ति हरिवंश राय बच्चन द्वारा लिखित कविता चिड़िया और चुरुंगुन से लिया गया है। चुरुंगुन अभी छोटा है लेकिन उसमें उड़ने की चाहत है और वह वस्तु तो जानने और पहचने लगी है वह अपनी माँ से हर बार पूछता रहता है कि माँ क्या मुझको उड़ना आया तो उसकी माँ उसे हर बार कहती है कि तुम्हें अभी उड़ना नहीं आया है।
व्याख्या :- उपर्युक्त पंक्ति में बताया गया है कि चुरुंगुन को अब कच्चे और पक्के फल को पहचाना आ गया है वह कुछ फल को खाता है और कुछ फल को काट कर गिरा देता है और कहता है कि मुझसे मिलकर खाने और खेलने वाले मेरे साथी मेरा प्रतीक्षा कर रहे है अर्थात मुझे खेलने जाना है फिर वह अपनी माँ से पूछता है कि क्या माँ मुझे अब उड़ना आ गया है तो उसकी माँ उसे फिर कहती है नहीं चुरुंगुन तुम्हें अभी उड़ना नहीं आया है ये तुम्हारा भ्रम है। 

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